StateNewsदेश - विदेश

बंगाल चुनाव 2026: ओवैसी और हुमायूं कबीर का गठबंधन, ममता की बढ़ी मुश्किलें

दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की बिसात बिछ चुकी है और इस बार असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अभेद्य ‘मुस्लिम वोट बैंक’ में सेंध लगाने की पूरी तैयारी कर ली है।

ओवैसी ने पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के साथ गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर दिया है, जो आगामी चुनावों में सत्ताधारी दल के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

182 सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य
हुमायूं कबीर ने राज्य की 294 सीटों में से 182 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। गठबंधन की रणनीति का सबसे दिलचस्प मोड़ भवानीपुर सीट पर देखने को मिला है, जहाँ ममता बनर्जी के खिलाफ मुस्लिम उम्मीदवार पूनम बेगम को मैदान में उतारा गया है। इस सीट पर पहले से ही भाजपा के सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी के कारण अब मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद कड़ा हो गया है।

गठबंधन के पीछे के मुख्य कारण
मुस्लिम भागीदारी का मुद्दा: ओवैसी का आरोप है कि बंगाल में 30% मुस्लिम आबादी होने के बावजूद पार्टियां उनका वोट तो लेती हैं, लेकिन उन्हें उचित हक और राजनीतिक भागीदारी नहीं देतीं।

हुमायूं कबीर की बगावत: मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के शिलान्यास को लेकर ममता बनर्जी से अनबन के बाद कबीर को टीएमसी से निष्कासित कर दिया गया था। अब वह खुद रेजिनगर और नौदा सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं।

वोट बैंक में सेंधमारी: सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक है। ओवैसी का लक्ष्य दबे-कुचले और अल्पसंख्यक समाज की आवाज को विधानसभा तक पहुँचाना है।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों—23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने हैं, जबकि नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी। ओवैसी और कबीर का यह गठबंधन निश्चित रूप से टीएमसी की चुनावी गणित को बिगाड़ सकता है, क्योंकि पिछले चुनावों में मुस्लिम समुदाय एकमुश्त ममता बनर्जी के साथ खड़ा रहा था।

Related Articles

Back to top button