छत्तीसगढ़ विधानसभा: महिलाओं की गुमशुदगी बहस, सदन में विपक्ष ने सत्ता पक्ष को घेरा

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में महिलाओं और बालिकाओं की गुमशुदगी का मुद्दा गूंजा, जिससे सदन में तीखी बहस देखने को मिली। विधायक संगीता सिन्हा द्वारा उठाए गए आंकड़ों ने प्रदेश में महिला सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विधायक संगीता सिन्हा ने जनवरी 2023 से जनवरी 2026 तक के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि केवल उनके क्षेत्र सनोद से ही 7,218 महिलाएं लापता हैं। उन्होंने एक विशेष घटना का जिक्र किया जहां पूजा करने गई महिला घर नहीं लौटी, और एफआईआर के बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
विपक्ष का मुख्य आरोप यह है कि शिकायत दर्ज होने के बाद भी जांच की गति बेहद धीमी रहती है। विधायक देवेंद्र यादव ने भी इस पर मुहर लगाते हुए कहा कि कई मामलों में महीनों बीत जाने के बाद भी पुलिस की कार्रवाई शून्य रहती है।
सरकार का पक्ष और बचाव
इन आरोपों का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्वीकार किया कि गुमशुदगी के मामले चिंताजनक हैं। हालांकि, उन्होंने पुलिस का बचाव करते हुए कहा कि हर बार पुलिस तंत्र पर उंगली उठाना सही नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि, जहां भी एफआईआर दर्ज होती है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। गुमशुदगी के कई मामलों के पीछे सामाजिक और व्यक्तिगत कारण भी होते हैं। सरकार महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशील है और पुलिस सक्रियता से काम कर रही है।
सदन में हुए इस हंगामे और विपक्ष के दबाव के बाद, गृहमंत्री ने आश्वासन दिया कि वे लंबित मामलों की स्वयं समीक्षा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन विशिष्ट प्रकरणों में देरी की शिकायत मिली है, उनकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह बहस दर्शाती है कि प्रदेश में महिला सुरक्षा एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है, जहां आंकड़ों की भयावहता और जमीनी कार्रवाई के बीच की खाई को पाटना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।



