तीसरी बार राज्यसभा से इनकार: एमपी में फुल टाइम एक्टिव होंगे दिग्विजय सिंह, कमलनाथ समेत 5 दिग्गज रेस में

दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा संकेत देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया है। उनका वर्तमान कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है और उन्होंने पार्टी नेतृत्व को स्पष्ट कर दिया है कि अब वे दिल्ली की राजनीति से दूर रहकर पूरी तरह मध्य प्रदेश में सक्रिय रहना चाहते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने आलाकमान से कहा है कि 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए वे प्रदेश में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे। इसके लिए मई से लेकर अगले ढाई साल तक अलग-अलग चरणों में प्रदेश के दौरे करेंगे। उनकी रणनीति बड़ी रैलियों के बजाय छोटी बैठकें, विधानसभा और ब्लॉक स्तर पर संवाद तथा सीधे कार्यकर्ताओं से जुड़ने की बताई जा रही है।
दिग्विजय हाल ही में दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के साथ संगठनात्मक सुधारों पर प्रेजेंटेशन भी दे चुके हैं। उन्होंने सुझाव दिया था कि बूथ से मंडल स्तर तक पदयात्रा, मंडल से ब्लॉक तक बाइक यात्रा और ब्लॉक से जिला स्तर तक संगठनात्मक यात्रा निकाली जाए, ताकि पार्टी का नेटवर्क फिर से मजबूत हो।
दिग्विजय के इस फैसले के बाद राज्यसभा की सीट को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। पूर्व सीएम कमलनाथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, CWC सदस्य कमलेश्वर पटेल, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। वहीं, अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पत्र लिखकर मांग की है कि इस बार राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग से किसी नेता को भेजा जाए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिग्विजय सिंह का यह कदम सिर्फ व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि प्रदेश की नई लीडरशिप पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है। वे यह संकेत देना चाहते हैं कि पार्टी को अगर मध्य प्रदेश में दोबारा सत्ता में लौटना है, तो सीनियर नेताओं के अनुभव और जमीनी राजनीति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।





