ताड़मेटला हमले के 11 आरोपी बरी: हाईकोर्ट बोला- 76 जवान शहीद हुए, लेकिन जांच एजेंसियां असली गुनहगारों तक नहीं पहुंचीं

बिलासपुर। दंतेवाड़ा के बहुचर्चित ताड़मेटला नक्सली हमले मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 11 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के बरी करने के फैसले को बरकरार रखा। इस मामले में 6 अप्रैल 2010 को हुए नक्सली हमले में CRPF के 75 जवान और एक पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने फैसले में जांच एजेंसियों पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी घटना और भारी जनहानि के बावजूद एजेंसियां असली हमलावरों की पहचान कर उन्हें कानून के कटघरे तक लाने में पूरी तरह नाकाम रहीं। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष विश्वसनीय और कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य पेश नहीं कर पाया, जिसके चलते ट्रायल कोर्ट को आरोपियों को बरी करना पड़ा।
हाईकोर्ट ने माना कि मामले में प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं थे, परिस्थितिजन्य साक्ष्य अधूरे थे और जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। अदालत ने कहा कि केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक आरोप संदेह से परे साबित न हों।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने आरोपी बरसे लखमा के कथित इकबालिया बयान और पाइप बम की बरामदगी को महत्वपूर्ण सबूत बताया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इन दावों का स्वतंत्र साक्ष्यों से समर्थन नहीं हुआ।
हाईकोर्ट ने सरकार को भविष्य में ऐसे मामलों की जांच में फोरेंसिक, तकनीकी और मजबूत प्राथमिक साक्ष्य जुटाने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि जांच में लापरवाही न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर करती है।
बताया जाता है कि इस हमले का मास्टरमाइंड नक्सली कमांडर हिडमा था, जो बाद में सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर आया और नवंबर 2025 में मुठभेड़ में मारा गया।





