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पुरी में कल से शुरू होगी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, हावड़ा में प्रोफेसर गोद में निकालते हैं रथयात्रा

दिल्ली। ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा 16 जुलाई, गुरुवार से शुरू होगी। नौ दिनों तक चलने वाला यह भव्य धार्मिक उत्सव 24 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान देश-विदेश से 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुरी के होटल, लॉज और गेस्ट हाउस पूरी तरह बुक हो चुके हैं। जिला प्रशासन के अनुसार, इस वर्ष फरवरी से ही बुकिंग शुरू हो गई थी और रथयात्रा मार्ग के आसपास स्थित होटलों की सबसे अधिक मांग रही।

रथयात्रा के चलते होटल किराए में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। सामान्य दिनों में 1500 से 2000 रुपए में मिलने वाला कमरा अब तीन दिनों के लिए 50 हजार रुपए तक में बुक हो रहा है।

खासकर वे कमरे, जिनकी बालकनी या खिड़की से रथयात्रा का सीधा दृश्य दिखाई देता है, सबसे महंगे साबित हो रहे हैं। पुरी शहर में करीब 1200 होटल हैं और लगभग सभी में कमरे पहले ही बुक हो चुके हैं।

इधर, पश्चिम बंगाल के हावड़ा में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की एक अनोखी परंपरा भी लोगों का ध्यान आकर्षित करती है।

यहां कोलकाता के सेंट पॉल कैथेड्रल मिशन कॉलेज के बांग्ला विभाग के प्रोफेसर डॉ. शेख मकबूल इस्लाम भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन के विग्रह को अपनी गोद में लेकर करीब 400 मीटर की परिक्रमा करते हैं। इस यात्रा में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोग समान श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं।

डॉ. शेख मकबूल 1992 से भगवान जगन्नाथ पर शोध कर रहे हैं और इस विषय पर 14 से अधिक पुस्तकें लिख चुके हैं।

उनका मानना है कि कठोपनिषद् के अनुसार शरीर ही वास्तविक रथ है, इसलिए अलग रथ की आवश्यकता नहीं। वे हर वर्ष अपने घर में पुरी की परंपरा के अनुसार 35 प्रकार का सात्विक भोग बनाकर भगवान जगन्नाथ को अर्पित करते हैं। यह अनूठी परंपरा सांप्रदायिक सौहार्द और आस्था का विशेष संदेश देती है।

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