रायपुर। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर छत्तीसगढ़ महिला मंच और महाराष्ट्र मंडल महिला समिति की पदाधिकारियों व सदस्यों ने समिति के समक्ष विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों पर सुझाव दिए।
बैठक में यूसीसी समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस एमके राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार ने महिलाओं के कानूनी और व्यावहारिक सुझाव सुने। समिति ने इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।
पैतृक संपत्ति में महिला-पुरुष को समान अधिकार
शताब्दी पाण्डेय ने धर्म आधारित कानूनों में बदलाव की जरूरत बताते हुए पैतृक और व्यक्तिगत संपत्ति में महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार देने की मांग की।
उन्होंने भरण-पोषण के नियमों में एकरूपता और आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाने का सुझाव दिया। जनजातीय बहुल छत्तीसगढ़ में स्थानीय समुदायों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और संस्कृति को ध्यान में रखकर व्यापक चर्चा की जरूरत भी बताई गई। पंचायत स्तर पर कानूनी सलाह के लिए विशेष डेस्क बनाने की मांग रखी गई।
श्वेता पड्डा ने महिलाओं के शोषण को रोकने के लिए लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन अनिवार्य करने का सुझाव दिया। उन्होंने लिव-इन से जन्मे बच्चों को पालन-पोषण और उत्तराधिकार का पूरा अधिकार देने तथा उनकी जैविक पहचान सुनिश्चित करने की मांग की।
महिला अधिवक्ता बोली कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत
अधिवक्ता सुचित्रा वर्धन ने लिव-इन संबंधों को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत बताई। अधिवक्ता हेमलता सिंह ने यूसीसी का उद्देश्य कानूनी भेदभाव खत्म कर व्यवस्था को सरल बनाना बताया। गीता श्याम दलाल ने समान कानून का समर्थन करते हुए कहा कि अपराधी को धर्म के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
बैठक में आस्था अभय काले सहित अन्य महिलाओं ने कमजोर वर्ग की महिलाओं तक कानून की पहुंच और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। समिति ने बच्चों के हित, आदिवासी समाज की सहभागिता और विवाह परंपराओं से जुड़े सुझावों को भी प्रमुखता से आयोग के समक्ष रखने का भरोसा दिलाया।
