MBBS छात्रों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: समय पर नियुक्ति नहीं तो सेवा बांड स्वतः खत्म, NOC जारी करने के निर्देश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के एमबीबीएस छात्रों को अनिवार्य सेवा बांड के मामले में हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
बिलासपुर हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि राज्य सरकार मेडिकल छात्रों को निर्धारित छह माह की अवधि के भीतर नियुक्ति आदेश जारी नहीं करती है, तो उनके द्वारा निष्पादित अनिवार्य सेवा बांड स्वतः निरस्त माना जाएगा। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने यह आदेश सुनाया।
यह फैसला वर्ष 2025 में सीआईएमएस बिलासपुर से एमबीबीएस और अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करने वाले नितीन कुमार सिंह, साहिल करी, चंद्र प्रकाश रवि और साक्षी कंवर की याचिका पर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने वैधानिक समय-सीमा में नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए, फिर भी उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देने से इनकार कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा ने कोर्ट में दलील दी कि छत्तीसगढ़ मेडिकल, डेंटल एवं फिजियोथेरेपी अंडर ग्रेजुएट प्रवेश नियम 2025 के नियम 10(6) के अनुसार इंटर्नशिप पूरी होने के छह माह के भीतर नियुक्ति आदेश जारी करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं होने पर सेवा बांड स्वतः समाप्त हो जाता है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने तर्क दिया कि छात्र सेवा बांड से बंधे हुए हैं और बाद में आयोजित काउंसलिंग में भी शामिल हुए थे। हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि वैधानिक अवधि समाप्त होने के बाद बांड संबंधी दायित्व स्वतः खत्म हो जाते हैं और बाद में जारी नियुक्ति आदेश प्रभावी नहीं माने जा सकते।
कोर्ट ने राज्य सरकार को बिना किसी बांड राशि या दंड की मांग किए तत्काल NOC जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही संबंधित विश्वविद्यालय को छात्रों की MBBS डिग्री जारी करने के आदेश भी दिए। इस फैसले को राज्य के अन्य MBBS स्नातकों के लिए भी महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है।





