छत्तीसगढ़

Chhattisgarh: बघेल का दावा झूठ का पुलिंदा, प्रदेश को कोरोना से जूझता छोड़ ग़ैर-ज़िम्मेदाराना राजनीतिक चरित्र का दिया परिचय : विष्णुदेव साय

रायपुर। (Chhattisgarh) भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने एक समाचार वेबसाइट से बातचीत में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा किए गए उस दावे को एकदम सफ़ेद झूठ करार दिया है कि उन्होंने (मुख्यमंत्री बघेल ने) छत्तीसगढ़ में कोरोना से लड़ने के बजाय असम के चुनाव को प्राथमिकता दी और जब असम में चुनाव प्रचार के लिए कुछ समय के लिए गए थे। (Chhattisgarh)तब प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दर काफी कम थी। साय ने कहा कि एक मुख्यमंत्री के तौर पर बघेल का यह दावा हास्यास्पद, सच से कोसों दूर और झूठ का पुलिंदा है, क्योंकि प्रदेश इस बात का साक्षी है कि मुख्यमंत्री बघेल पहले विधानसभा का बज़ट सत्र समय पूर्व स्थगित कर असम गए और उसके बाद केवल क्रिकेट मैच कराने रायपुर आये। बघेल ने प्रदेश को कोरोना से जूझने के लिए उसके हाल पर छोड़कर अपने ग़ैर-ज़िम्मेदाराना राजनीतिक चरित्र का परिचय दिया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री साय ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के तेज़ी से फैलाव के लिए प्रदेश सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकती क्योंकि कोरोना से मुक़ाबले में प्रदेश सरकार ने न तो मज़बूत इच्छाशक्ति का परिचय दिया और न ही कोरोना की जाँच, उपचार, कोविड सेंटर्स की पुख़्ता व्यवस्था, दवाओं की सुलभ उपलब्धता, कोरोना संक्रमितों के लिए अस्पतालों में बेड व ऑक्सीज़न मुहैया कराने की अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वहन किया। साय ने कहा कि अप्रैल माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प. बंगाल की रैलियों पर सवाल उठाने से पहले बार-बार चुनावी रैलियों के लिए असम जाने वाले मुख्यमंत्री बघेल अपने ट्वीटर हैंडल को खंगाल लें जिससे मार्च माह में हुए 215 ट्वीट और रिट्वीट में सिर्फ़ 06 (छह) ट्वीट ही ऐसे हैं, जिनमें प्रदेश के केरेना संक्रमण का ज़िक्र है जबकि 108 ट्वीट असम चुनाव प्रचार को लेकर हैं।

साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी चुनावी रैलियों में अपनी व्यस्तता के बावज़ूद देशभर में फैलते कोरोना संक्रमण पर नज़र रखे हुए थे और मुख्यमंत्रियों से उनका संवाद जारी था। लेकिन मुख्यमंत्री बघेल तब भी प्रधानमंत्री द्वारा कोरोना संक्रमण को लेकर बुलाई गई मुख्यमंत्रियों की बैठक में मौज़ूद रहने के बजाय असम में चुनाव प्रचार के लिए चले गए थे! बघेल ने वर्चुअल बैठक में भी जुड़ने का फुरसत नहीं निकाला न ही उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को उस महत्वपूर्ण बैठक में शमिल होने दिया, कौन-सी ज़वाबदेही है?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष साय ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण की भयावहता की दूसरी लहर का अंदेशा तो मार्च माह की शुरुआत से ही हो गया था और प्रदेश सरकार को इस लिहाज़ से तमाम इंतज़ाम कर लेने थे, लेकिन सियासी नौटंकियाँ जिनकी फ़ितरत में थी, उन्होंने तब इसकी अनदेखी की जिसका खामियाजा आज छत्तीसगढ़ प्रदेश भोग रहा है। साय ने कहा कि प्रदेश के हर छोटे-बड़े नगरों-शहरों में आधी-आधी रात तक अस्पतालों की चौखटों पर गिड़गिड़ाते कोरोना संक्रमित और उनके परिजनों की व्यथा, राजधानी के अस्पतालों में बेड की उम्मीद लिए ज़िंदग़ी और मौत की लड़ाई लड़ते, तड़पते और अंतत: दम तोड़ते मरीजों से जुड़ी ख़बरें, वीडियो क्लिप क्या झूठे हैं? श्री साय ने सवाल किया कि प्रदेश सरकार ने जब प्रदेश के हाईकोर्ट में राज्य के सरकारी अस्पतालों में 1,947 ऑक्सीज़न बेड, 113 एचडीयू बेड, 143 आईसीयू बेड और 227 वेंटीलेटर बेड खाली पड़े हैं तो फिर प्रदेशभर में कोरोना संक्रमितों को भर्ती करने के नाम पर हाहाकार क्यों मचा हुआ है? क्यों प्रदेश के राजधानी समेत अनेक स्थानों पर कोरोना मरीजों ने ऑक्सीज़न की कमी के चलते दम तोड़ दिया? ज़मीनी सच्चाइयों से ज़रा भी मेल नहीं खाते प्रदेश सरकार के आँकड़े उच्च न्यायालय को क्या ग़ुमराह नहीं कर रहे हैं? साय ने कांग्रेस नेताओं, मुख्यमंत्री बघेल समेत उनके ‘स्वयंभू कोरोना प्लेयर्स’ मंत्रियों को अपने झूठ का रायता फैलाकर प्रदेश को भरमाने से बाज आने की नसीहत दी है।

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