विष्णुभोग चावल से चमकी GPM की पहचान: 1500 किसान 600 एकड़ में कर रहे खेती, महिलाओं ने 2 टन चावल बेचकर कमाया 1 लाख का मुनाफा

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ का 25वां जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ सुगंधित विष्णुभोग चावल के लिए भी पहचान बना रहा है। भारत सरकार की एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) योजना में विष्णुभोग चावल को जिले के प्रमुख उत्पाद के रूप में चुना गया है। अपनी खास खुशबू, स्वाद और पारंपरिक खेती के कारण यह चावल अब जिले की सीमाओं से निकलकर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों तक पहुंच रहा है।

600 एकड़ में 1500 किसान कर रहे खेती

पेंड्रा क्षेत्र में करीब 1500 किसान 600 एकड़ जमीन में विष्णुभोग धान की खेती कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते किसानों के कदम और सामूहिक प्रयासों से इस पारंपरिक धान को बाजार में नई पहचान मिल रही है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

महिलाओं ने संभाली प्रोसेसिंग और मार्केटिंग

विष्णुभोग की पूरी वैल्यू चेन में महिलाओं की भूमिका अहम हो गई है। मलनिया महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, पेंड्रा किसानों से धान खरीदती है। इसके बाद मिनी राइस मिल में प्रसंस्करण कर चावल की पैकेजिंग और ब्रांडिंग की जाती है।

कंपनी से जुड़ी 15 महिला सदस्यों को रोजगार मिला है। अब तक महिलाओं ने करीब 2 टन विष्णुभोग चावल बेचकर लगभग 1 लाख रुपए का लाभ कमाया है। समूह की महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होकर लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

खेत से बाजार तक पहुंची विष्णुभोग की खुशबू

एक जिला-एक उत्पाद योजना से विष्णुभोग को उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का अवसर मिल रहा है। इसकी बढ़ती मांग किसानों और महिला उद्यमियों के लिए नए रास्ते खोल रही है।

विष्णुभोग चावल अब केवल एक पारंपरिक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि किसानों की आय, महिलाओं के स्वावलंबन और स्थानीय उद्यमिता की पहचान बन रहा है। आने वाले समय में बेहतर ब्रांडिंग और बाजार उपलब्धता से यह जीपीएम की कृषि विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।

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