गांव की आबादी 1300, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र 27 हजार: महाराष्ट्र में CRS फर्जीवाड़ा, सरकार ने SIT गठित की

मुंबई। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में शेंदुरसानी ग्राम पंचायत में सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पकड़ में आई है। सिर्फ 1300 की आबादी वाले इस गांव में तीन महीनों के भीतर 27,398 जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए गए। यह संख्या सामान्य जनसांख्यिकीय आंकड़ों से कई गुना अधिक है, जिससे फर्जीवाड़े और डिजिटल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की है। महाराष्ट्र पुलिस के साइबर एडीजी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। SIT में डिप्टी डायरेक्टर ऑफ हेल्थ सर्विसेज और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ ऑफिसर भी शामिल हैं। पुलिस ने BNS और आईटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है। शुरुआती जांच यवतमाल एसडीओपी ने की थी, इसके बाद गृह विभाग ने जांच SIT को सौंप दी।
सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) क्या है?
CRS सरकारी रिकॉर्ड सिस्टम है, जिसमें जन्म और मृत्यु का डेटा दर्ज होता है। इसी से जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए जाते हैं। यह प्रणाली राज्य सरकार, जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत या नगर निकाय द्वारा संचालित होती है। अस्पताल, पंचायत और नगर निगम से डेटा CRS में दर्ज किया जाता है। CRS डेटा स्कूल एडमिशन, पासपोर्ट, पेंशन, बीमा और सरकारी योजनाओं में उपयोग होता है। यदि समय पर डेटा दर्ज न हो, तो डिलेयड रजिस्ट्रेशन (Delayed Registration) किया जा सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि फर्जी एंट्री, प्रमाणपत्रों में छेड़छाड़ या गलत डेटा दर्ज करना अपराध है और इसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। SIT की जांच में अब यह स्पष्ट करना है कि प्रमाणपत्रों का इस हद तक फर्जीवाड़ा कैसे हुआ और कौन-कौन इसमें शामिल है।





