मालदा में SIR को लेकर बवाल: 22 लाख वोटरों के नाम कटने पर चक्काजाम, 7 जजों का घेराव

मालदा । पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। मालदा जिले के मानिकचक में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विरोध में मुस्लिम समुदाय के लोग पिछले 24 घंटे से सड़क पर डटे हुए हैं। इस प्रदर्शन के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों (जजों) को बंधक बनाए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि चुनाव आयोग द्वारा जारी सप्लीमेंट्री लिस्ट में बंगाल के करीब 22 लाख वोटरों के नाम काट दिए गए हैं। मालदा में यह विरोध उग्र रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों और न्यायाधीशों ने जानबूझकर एक विशेष समुदाय के नाम सूची से हटाए हैं। इसी के विरोध में मानिकचक में चक्काजाम कर दिया गया है।
7 न्यायिक अधिकारियों का घेराव
सबसे चिंताजनक स्थिति न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर बनी हुई है। बुधवार शाम 4 बजे से ही कालियाचक और मालदा के सात ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को प्रदर्शनकारियों ने घेर रखा है, जिनमें चार महिला जज भी शामिल हैं। रिपोर्ट लिखे जाने तक स्थानीय प्रशासन और पुलिस उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में सफल नहीं हो पाई थी। इस घटना की जानकारी कलकत्ता हाई कोर्ट और चुनाव आयोग को भी दे दी गई है।
सुरक्षा पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में SIR कार्य में लगे न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए थे, बावजूद इसके इस तरह की घटना ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मालदा के पुलिस अधीक्षक अनुपम सिंह ने बताया कि स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इस घटना पर राज्य के डीजीपी से रिपोर्ट तलब की है। आयोग फिलहाल प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने की नीति अपना रहा है और बल प्रयोग से बच रहा है। क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है, लेकिन प्रदर्शनकारी नाम दोबारा सूची में जोड़ने की मांग पर अड़े हुए हैं।





