गरियाबंद

Gariyaband: किडनी देकर बेटे को मौत के मुंह से पिता ने खिंचा,एक ही किडनी के भरोशे चल रही पिता की जिंदगी

रवि तिवारीॅॅॅ@देवभोग। (Gariyaband) आज फादर्स डे पर देवभोग के एक पिता की ऐसी कहानी से आपको रूबरू करवाने जा रहे है,जिसे पढ़कर आप भी कहेंगे वाकये में पिता ने काल के गाल से अपने बेटे को बचाकर ले आये है।

जी हां ये कहानी देवभोग के माँझीपारा के एक अग्रवाल परिवार की है। (Gariyaband) यहां रहने वाले लक्ष्मीनारायण अग्रवाल ने अपने बड़े बेटे जगदीश प्रसाद अग्रवाल को एक किडनी देकर अकाल मौत की आगोश में समाने से बचा लिया। आज से करीब साढ़े तीन साल पहले बेटे जगदीश की दोनों किडनी खराब होने की जानकारी विशाखापट्टनम के एक बड़े अस्पताल में मिली। उस दौरान परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। (Gariyaband) वही दोनों किडनी खराब होने पर जगदीश की तबीयत बहुत ज्यादा खराब होती जा रही थी। बेटे की बिगड़ती तबीयत को देख पिता ने तुरंत निर्णय लिया कि वे अपना एक किडनी देकर बेटे की जान बचाएंगे। वही पिता ने अपने बुढ़ापे के उम्र में भी अपनी जान की परवाह किये बिना बेटे को एक किडनी देकर जीवन दान दिया।

आज भी समय पर बेटे का करवा रहे इलाज

उम्र का 79वां पड़ाव पार कर चुके लक्ष्मीनारायण अग्रवाल आज भी अपने बेटे के इलाज के प्रति बहुत ज्यादा समर्पित है। उनकी दी हुई किडनी से ढाई साल तक बेटे की स्थिति तो ठीक रही,लेकिन ढाई साल बाद उस किडनी ने भी काम करना बंद कर दिया। आज पिछले एक साल से डायलिसिस के भरोसे बेटे जगदीश की जिंदगी चल रही है। वही बेटे के इलाज को लेकर भी जगदीश प्रसाद बहुत ज्यादा गम्भीर है। आज भी वे अपने बेटे का समय पर डायलिसिस करवा रहे है। इतना ही नही 79 साल की उम्र में भी किराने का व्यापार चलाकर बेटे के इलाज में लगने वाले खर्चे को भी वे ही वहन करते है। यहां बताना लाज़मी होगा कि पीड़ित जगदीश प्रसाद के सभी भाइयों का भी इलाज को लेकर बराबर का सहयोग रहता है

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