जजों का तबादला न्यायपालिका का आंतरिक मामला: सरकार के खिलाफ फैसले पर ट्रांसफर ठीक नहीं, संविधान सर्वोच्च है

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने शनिवार को कहा कि जजों का तबादला न्यायपालिका का आंतरिक विषय है और इसमें सरकार या केंद्र की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने साफ कहा कि सरकार के खिलाफ फैसले देने वाले जजों का ट्रांसफर करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हस्तक्षेप है। जस्टिस भुइयां पुणे के ILS लॉ कॉलेज में आयोजित प्रिंसिपल जीवी पंडित मेमोरियल लेक्चर में बोल रहे थे।
उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर किसी जज के ट्रांसफर के प्रस्ताव में यह दर्ज हो कि बदलाव केंद्र सरकार के पुनर्विचार के कारण हुआ, तो यह कॉलेजियम की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जस्टिस भुइयां ने कहा कि हाई कोर्ट जजों की पोस्टिंग या ट्रांसफर पूरी तरह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में है और इसका उद्देश्य न्याय के बेहतर प्रशासन से जुड़ा होना चाहिए, न कि कार्यपालिका के प्रभाव से।
उन्होंने संविधान की सर्वोच्चता पर जोर देते हुए कहा कि भारत में संसद नहीं, बल्कि संविधान सर्वोच्च है। संविधान निर्माताओं ने जानबूझकर संसद की संप्रभुता के बजाय संविधान की सर्वोच्चता को चुना।
अपने संबोधन में जस्टिस भुइयां ने जस्टिस अतुल श्रीधरन के ट्रांसफर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से जस्टिस श्रीधरन का ट्रांसफर छत्तीसगढ़ के बजाय इलाहाबाद हाईकोर्ट करने की सिफारिश की थी, जिसमें केंद्र सरकार के पुनर्विचार का उल्लेख था। यह फैसला इसलिए भी चर्चा में रहा, क्योंकि जस्टिस श्रीधरन को एक स्वतंत्र और बेबाक जज माना जाता है।





