रायपुर। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है।
मैनपुर क्षेत्र के पहाड़ी इलाके में रहने वाले विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के एक बुजुर्ग को समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण परिजनों को उन्हें खाट पर लादकर 17 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो दावों और धरातल के बीच के अंतर को उजागर करता है।
पहाड़ों से नीचे उतरने की जद्दोजहद
घटना बुधवार सुबह की है, जब कुल्हाड़ीघाट क्षेत्र के 60 वर्षीय मनू राम अचानक बेसुध होकर गिर पड़े। उनके पास अस्पताल पहुँचने का कोई साधन नहीं था। परिजनों ने हिम्मत नहीं हारी और बुजुर्ग को खाट पर लिटाकर कंधों के सहारे ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों से करीब 17 किलोमीटर दूर पंचायत मुख्यालय तक पहुँचाया।
पंचायत मुख्यालय पहुँचने के बाद भी परिजनों को सरकारी एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल सकी। अंततः मजबूर होकर परिजनों ने एक निजी वाहन की व्यवस्था की और उन्हें मैनपुर अस्पताल ले गए, जहाँ से गंभीर स्थिति देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर किया गया।
प्रशासनिक अनभिज्ञता और स्वास्थ्य स्थिति
हैरानी की बात यह रही कि स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस घटना से अनजान बने रहे। मैनपुर बीएमओ ने पहले मामले की जानकारी होने से इनकार किया, हालांकि बाद में बताया कि मरीज को पैरालिसिस (लकवा) अटैक आया था और परिजनों ने शायद कॉल नहीं किया होगा।
वर्तमान में जिला अस्पताल में भर्ती डॉ. हरीश चौहान ने पुष्टि की है कि मरीज ‘स्ट्रोक’ का शिकार हुआ है और उनके दाहिने हिस्से में लकवा मार चुका है।
यह घटना पहाड़ी और वनांचल क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ों पर बसे गांवों के लिए आज भी ‘खाट’ ही एंबुलेंस बनी हुई है। लोग मांग कर रहे हैं कि दुर्गम इलाकों में कम से कम बाइक एंबुलेंस या मोबाइल मेडिकल यूनिट की पुख्ता व्यवस्था की जाए ताकि किसी और को 17 किमी का यह ‘अग्निपथ’ पार न करना पड़े।
