SIR पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, CM ममता खुद रख सकती हैं दलीलें

दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई होगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट में हो रहे संशोधन को चुनौती दी है। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा जारी आदेशों को मनमाना बताते हुए मांग की है कि 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पुराने मतदाता सूची के आधार पर ही कराए जाएं।
इस मामले में ममता के अलावा मोस्तारी बानू और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन की याचिकाएं भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खुद सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहने की संभावना है। TMC नेताओं का दावा है कि LLB डिग्री होल्डर ममता कोर्ट में स्वयं अपनी दलीलें भी रख सकती हैं।
मामले की सुनवाई CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल होंगे। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले SIR प्रक्रिया शुरू करना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर डाल सकता है और इससे आम मतदाताओं को परेशानी हो रही है।
इससे पहले 3 फरवरी को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने सवाल उठाया था कि चुनाव से पहले SIR क्यों किया जा रहा है, जबकि बंगाल समेत चार राज्यों में चुनाव होने हैं। उन्होंने दावा किया था कि SIR तीन राज्यों में हो रहा है, लेकिन भाजपा शासित असम में नहीं। ममता ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने उनके छह पत्रों का जवाब नहीं दिया।
SIR के विरोध में ममता ने 26 कविताओं की किताब लिखने का भी दावा किया है। वहीं 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने SIR को लेकर कहा था कि प्रक्रिया पारदर्शी हो और आम लोगों को असुविधा न हो। कोर्ट ने ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सूची को पंचायत और ब्लॉक कार्यालयों में प्रदर्शित करने के निर्देश दिए थे।





