हिंदू-मुस्लिम विवाद की जड़ में सेक्युलरिज्म की गलत व्याख्या कांग्रेस ने की: गडकरी

दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि देश में आज जो हिंदू-मुस्लिम से जुड़ी समस्याएं दिखाई देती हैं, उनकी मुख्य वजह कांग्रेस की सेक्युलरिज्म को लेकर अपनाई गई गलत सोच और वर्षों से चली आ रही वोट बैंक की राजनीति है। गडकरी मंगलवार को दिल्ली में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष प्रोफेसर वासुदेव देवनानी की किताब ‘सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि’ के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन भी मौजूद रहे।
गडकरी ने कहा कि सेक्युलर शब्द का अर्थ किसी एक वर्ग का तुष्टिकरण या धर्मनिरपेक्षता के नाम पर विशेष व्यवहार करना नहीं है। इसका सही मतलब ‘सर्व धर्म समभाव’ है, यानी सभी धर्मों को समान सम्मान, सबको न्याय और बराबरी का व्यवहार। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सेक्युलरिज्म की ऐसी व्याख्या की, जिससे समाज में विभाजन की भावना मजबूत हुई और आज भी उसके दुष्परिणाम देश भुगत रहा है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन को दोहराते हुए गडकरी ने कहा कि भारत पहले भी सेक्युलर था, आज भी है और हमेशा रहेगा। यह किसी राजनीतिक दल या संगठन की देन नहीं, बल्कि भारतीय, हिंदू और सनातन संस्कृति की विरासत है, जो विश्व कल्याण और सभी को साथ लेकर चलने की सीख देती है। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास में किसी हिंदू राजा द्वारा धार्मिक स्थलों को नष्ट करने का उदाहरण नहीं मिलता, क्योंकि भारतीय संस्कृति मूल रूप से सहिष्णु और करुणामय रही है।
इसी दिन गडकरी उदय माहुरकर की किताब ‘माय आइडिया ऑफ नेशन फर्स्ट: रिडिफाइनिंग अनएलॉयड नेशनलिज्म’ के लोकार्पण समारोह में भी शामिल हुए। यहां उन्होंने कहा कि ‘नेशन फर्स्ट’ की सोच केवल नारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके लिए देश के इतिहास को ईमानदारी से समझना, व्यवस्था की कमियों को पहचानना और भविष्य की क्षमताओं को विकसित करना जरूरी है। गडकरी ने जोर देकर कहा कि आधुनिकीकरण अंधी नकल से नहीं, बल्कि सभ्यतागत आत्मविश्वास से आगे बढ़ना चाहिए।





