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घनी बस्तियों में टीबी का खतरा ज्यादा: 1.65 लाख संदिग्ध मरीज, इलाज सिर्फ 33 हजार का

रायपुर। टीबी जैसी गंभीर और घातक बीमारी की रोकथाम और इलाज को लेकर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही खुलकर सामने आ गई है।

बीते एक साल में प्रदेश में 1 लाख 65 हजार से अधिक टीबी के संदिग्ध मरीजों की पहचान की गई, लेकिन इनमें से केवल 33 हजार लोगों को ही एहतियाती इलाज उपलब्ध कराया जा सका।

ये सभी संदिग्ध किसी न किसी रूप में टीबी मरीजों के संपर्क में रहे हैं, ऐसे में समय पर जांच और इलाज न होना संक्रमण के तेजी से फैलने का खतरा बढ़ा रहा है।

एक्स-रे जांच की स्थिति और भी चिंताजनक है। सरकारी अस्पतालों में 28 लाख से अधिक मरीजों को टीबी के संदेह में एक्स-रे जांच के लिए चुना गया, लेकिन इनमें से सिर्फ 8 लाख की ही जांच हो सकी।

रायपुर सहित राज्य के सभी जिलों में यही हाल है। रिपोर्ट के अनुसार एक्स-रे जांच में 8 जिले रेड जोन में हैं, जबकि संदिग्ध मरीजों के इलाज में 11 जिले रेड जोन में शामिल हैं। किसी भी जिले में 100 प्रतिशत जांच और इलाज नहीं हो पा रहा है।

रायपुर जैसे संसाधन संपन्न जिले में भी केवल 41 प्रतिशत संदिग्धों की ही एक्स-रे जांच की गई है। कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और पीएचसी में एक्स-रे मशीनें खराब रहती हैं या फिल्म की कमी बनी रहती है, जिससे जांच प्रभावित हो रही है।

घनी और झुग्गी बस्तियों में संदिग्धों की जांच के लिए भेजी जाने वाली टीमें भी कई जिलों में लक्ष्य से काफी पीछे हैं। सक्ती, बेमेतरा, जशपुर, नारायणपुर, केसीबी, दंतेवाड़ा, बिलासपुर और बालोद जैसे जिले इस मामले में रेड जोन में हैं।

भास्कर एक्सपर्ट डॉ. सुभाष मिश्रा के अनुसार टीबी अत्यंत घातक बीमारी है, इसलिए संदिग्धों की समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है। प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कर ही इस बीमारी के फैलाव को रोका जा सकता है।

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