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बसंत पंचमी पर भोजशाला में पूजा का फैसला आज सुप्रीम कोर्ट में, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

भोपाल। मध्य प्रदेश के धार जिले में भोजशाला मामले में आज (22 जनवरी) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने जा रही है।

हिंदू पक्ष ने 23 जनवरी को बसंत पंचमी के दिन पूरे दिन वाग्देवी यानी मां सरस्वती की अखंड पूजा की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी। अदालत ने याचिका को स्वीकार किया है।

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन ने याचिका में मांग की है कि इस दिन केवल हिंदू समाज को पूजा की अनुमति मिले और मुस्लिम समुदाय की जुमे की नमाज पर रोक लगाई जाए।

भोजशाला परिसर में मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ होता है, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय जुमे की नमाज अदा करता है। पिछले वर्षों में शुक्रवार को बसंत पंचमी आने पर यहां विवाद और तनाव की स्थितियां बनती रही हैं। 2003, 2013 और 2016 में इसी तरह के मौके पर हिंसा और तनाव हुए थे।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। धार में कुल 8 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें 50 प्रतिशत बल बुधवार रात तक पहुंच चुका।

पुलिस ने परिसर का 3डी मैपिंग किया है और सीसीटीवी, बाइक-पार्टी व मोबाइल-पार्टी से निगरानी रखी जाएगी। परिसर में जिग-जैग बैरिकेडिंग की गई है और 300 मीटर के दायरे को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में ड्रोन, पैराग्लाइडिंग और हॉट एयर बैलून जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी।

भोजशाला परिसर में प्रवेश जिग-जैग से होगा और पुलिस की निगरानी लगातार बनी रहेगी। सार्वजनिक सड़कों पर भवन सामग्री और लावारिस गुमटियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

धार में बसंत पंचमी पर पूजा और शुक्रवार को नमाज की व्यवस्था विवादों के बाद धीरे-धीरे तय की गई। 1995 के बाद से परिसर में मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई है।

पिछले विवादों के कारण प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश नियमों को और सख्त कर दिया है। आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि बसंत पंचमी पर अखंड पूजा पूरे दिन हो पाएगी या नहीं।

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