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RSS का संगठनात्मक विस्तार: 46 प्रांतों से 86 संभागों तक का सफर

दिल्ली। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने घोषणा की है कि RSS अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। बढ़ते कार्यक्षेत्र और समाज की बढ़ती उम्मीदों को देखते हुए अब संगठन को 86 संभागों में बांटा जाएगा।

पहले संघ में 46 प्रांत हुआ करते थे, जिन्हें अब छोटी इकाइयों में विभाजित किया जा रहा है ताकि स्थानीय स्तर पर काम अधिक प्रभावी और सुगम तरीके से हो सके। भागवत ने स्पष्ट किया कि संगठन का विस्तार तेजी से हो रहा है, इसलिए कार्य का विकेंद्रीकरण समय की मांग है।

संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के बावजूद भागवत ने जोर देकर कहा कि संघ के मूल काम करने का तरीका नहीं बदलेगा। परस्पर मित्रता और व्यक्तिगत उदाहरणों के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाना ही संघ की प्राथमिकता बनी रहेगी।

इसके साथ ही, उन्होंने आधुनिक माध्यमों की उपयोगिता को स्वीकार करते हुए कहा कि संघ अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स के साथ भी संवाद कर रहा है। जहां शाखाएं नहीं लग पा रही हैं, वहां स्वयंसेवक सोसायटियों और बहुमंजिला इमारतों में जाकर लोगों से जुड़ रहे हैं।

बयानों पर विवाद और संघ की भूमिका

अपने बयानों को अक्सर गलत संदर्भ में पेश किए जाने पर भागवत ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्हें ऐसी कोशिशों पर हंसी आती है और वे ऐसे लोगों के प्रति सहानुभूति रखते हैं।

उन्होंने हाल के दिनों में स्पष्ट किया था कि संघ को सत्ता या शक्ति की लालसा नहीं है और न ही वह प्रत्यक्ष रूप से राजनीति में शामिल है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि भाजपा जैसे राजनीतिक दलों में कई स्वयंसेवक सक्रिय हैं, लेकिन वे संगठन से अलग अपनी भूमिका निभाते हैं।

सुरक्षा और पहचान पर स्पष्ट रुख

मोहन भागवत ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी अपना दृष्टिकोण दोहराया। उन्होंने कहा कि देश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की पहचान करना और उन्हें बाहर करना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने ‘हिंदू’ शब्द की व्यापक व्याख्या करते हुए कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग हिंदू हैं, क्योंकि यह किसी विशेष पूजा पद्धति या समुदाय का नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक पहचान का नाम है।

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