जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर को ‘नक्सल मुक्त’ घोषित करने की सरकारी डेडलाइन खत्म होने में अब महज 7 दिन बचे हैं। इससे ठीक पहले पुलिस को अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है।
बस्तर का आखिरी खूंखार लड़ाकू और टॉप नक्सली लीडर पापाराव उर्फ मंगू (56) ने अपने 17 साथियों के साथ बीजापुर के कुटरू थाने में आत्मसमर्पण कर दिया है।डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने इस ऐतिहासिक सफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि सरेंडर करने वालों में 10 पुरुष और 8 महिलाएं शामिल हैं। नक्सलियों ने भारी मात्रा में आधुनिक हथियार सौंपे हैं, जिनमें:
पापाराव कोई मामूली नक्सली नहीं था, वह DKSZCM (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) का मेंबर और पश्चिम बस्तर डिवीजन का इंचार्ज था। वह दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का अहम सदस्य भी रहा है। जल-जंगल-जमीन की सटीक जानकारी होने के कारण वह कई बार पुलिस मुठभेड़ से बच निकला था।
बस्तर से माओवाद का ‘सफाया’ तय
जानकारों का मानना है कि पापाराव के सरेंडर के साथ ही नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी लगभग खत्म हो गई है। बटालियन नंबर 1 के कमांडर देवा के बाद पापाराव ही एकमात्र सक्रिय ‘फाइटर’ बचा था। संगठन के अन्य टॉप कैडर या तो मारे जा चुके हैं या अब बूढ़े हो चुके हैं।
एक साल में ऐसे बिखरा साम्राज्य
पिछले एक साल के भीतर खूंखार माड़वी हिड़मा, सचिव बसवाराजू और गणेश उइके जैसे 17 बड़े नक्सली एनकाउंटर में मारे गए। वहीं भूपति, रूपेश और रामधेर जैसे दिग्गजों ने पहले ही हथियार डाल दिए थे।
कुटरू थाने से जगदलपुर ले जाते समय बस में चढ़ते हुए पापाराव के चेहरे पर मुस्कान देखी गई, जो बस्तर में बदलते हालातों की गवाही दे रही है। सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा है। अब बस्तर में शांति बहाली की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
