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नाबालिगों से वेश्यावृत्ति कराता था होटल संचालक, हाईकोर्ट ने तीन साल तक होटल बंद रखने का आदेश बरकरार रखा

भुवनेश्वर। ओडिशा हाईकोर्ट ने पुरी में नाबालिग को वेश्यावृत्ति में धकेले जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए होटल संचालक की याचिका खारिज कर दी और पुरी एसडीएम द्वारा होटल को तीन साल तक बंद रखने के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि बच्चों को जीवन की अच्छी नींव से वंचित करना मानवता के खिलाफ अपराध है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस एम.एस. रमण की खंडपीठ ने साफ किया कि मजिस्ट्रेट का आदेश इमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट, 1956 की धारा 18(1) के अनुरूप है और इसमें किसी तरह की त्रुटि नहीं है। कोर्ट ने इस घटना को “उद्वेगजनक” बताते हुए कहा कि नाबालिगों को वेश्यावृत्ति में धकेलना समाज के लिए खतरे की घंटी है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बच्चे मासूम और आघात-प्रवण होते हैं, उनका जीवन आनंद, खेलकूद और सीखने से भरा होना चाहिए। ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जरूरी है ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए कि महिलाओं और बच्चों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गौरतलब है कि पुरी तालबनिया थाना क्षेत्र के एक होटल में देह व्यापार की शिकायत पर पुलिस ने छापेमारी की थी। इस दौरान खुलासा हुआ कि एक नाबालिग और उसकी बहन को विभिन्न स्थानों पर ले जाकर वेश्यावृत्ति में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा था। घटना के बाद पुरी एडीएम ने होटल को तीन साल के लिए बंद करने का आदेश दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए होटल संचालक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सरकार की ओर से अतिरिक्त स्टैंडिंग काउंसिल संजय रथ ने मामले की पैरवी की।

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