सिंधी समाज का इतिहास पुरुषार्थ, साहस और आत्मसम्मान का प्रतीक: सीएम साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सोमवार को राजधानी रायपुर के बीटीआई ग्राउंड में आयोजित ‘चन्ड्र जी रात, सिंधिन जो मेलो – आनंद मेलो’ में शामिल हुए। छत्तीसगढ़ सिंधी सेवा महापंचायत द्वारा आयोजित इस भव्य सांस्कृतिक समारोह में मुख्यमंत्री ने समाज की जीवटता और प्रदेश के विकास में उनके योगदान की जमकर सराहना की।

शून्य से शिखर तक का सफर

मुख्यमंत्री साय ने सिंधी समाज के संघर्षपूर्ण इतिहास को याद करते हुए कहा कि विभाजन की विभीषिका में अपना सब कुछ खो देने के बावजूद इस समाज ने कभी अपना आत्मसम्मान और पुरुषार्थ नहीं खोया। उन्होंने कहा “सिंधी समाज ने दुनिया को सिखाया है कि मेहनत के दम पर शून्य से शिखर तक कैसे पहुँचा जाता है। आपके पूर्वजों ने घर छोड़ा, संपत्ति छोड़ी, लेकिन परिश्रम करने का अपना स्वभाव कभी नहीं छोड़ा।”

अर्थव्यवस्था की रीढ़ है सिंधी समाज

छत्तीसगढ़ की प्रगति में समाज की भूमिका को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापार और उद्योग जगत में सिंधी समाज की मेहनत से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है। चेंबर ऑफ कॉमर्स से लेकर छोटे-बड़े व्यवसायों तक, यह समाज न केवल व्यापार करता है बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराता है। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘विकसित छत्तीसगढ़ 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सिंधी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।

सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव

मुख्यमंत्री ने ‘सिंधियत जो मेलो’ जैसे आयोजनों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी भाषा, खान-पान और समृद्ध संस्कृति से जोड़ने का सेतु हैं। उन्होंने शदाणी दरबार की अपनी हालिया यात्रा का स्मरण करते हुए समाज की एकजुटता को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताया।

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