डीएसएफ जवानों की पुलिस कांस्टेबल जैसी सुविधाओं की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में बस्तर के 4,000 से अधिक सहायक आरक्षकों और डीएसएफ (डिस्ट्रिक्ट स्ट्राइक फोर्स) के जवानों ने पुलिस कांस्टेबल के समान वेतन और सुविधाओं की मांग की थी।

याचिका में कहा गया कि सहायक आरक्षकों को डीएसएफ में प्रमोशन मिले, जवानों का वेतन और अन्य सुविधाएं जिला पुलिस बल के बराबर हों, और गोपनीय सैनिकों को आरक्षक बनाया जाए। इसमें उल्लेख किया गया कि छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल के निर्णयानुसार सहायक आरक्षक के पद को समाप्त कर डीएसएफ का गठन किया गया था। इसके तहत लगभग 2,700 सहायक आरक्षकों को डीएसएफ में शामिल किया गया, जबकि बाकी आरक्षक अभी भी डीएसएफ बनने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

याचिका में यह भी कहा गया कि जिन्हें डीएसएफ बनाया गया है, उन्हें जिला पुलिस बल के आरक्षकों के समान वेतन नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा, डीएसएफ जवानों के परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिल रही है, जबकि जवानों से पूरे काम पुलिस आरक्षक के बराबर लिया जा रहा है। इसी तरह, गोपनीय सैनिक कई वर्षों से अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा दे रहे हैं, पर उन्हें आरक्षक नहीं बनाया गया है।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला जनहित याचिका का विषय नहीं है, बल्कि यह सेवा संबंधित (सर्विस मैटर) मामला है। इसलिए अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार के विषयों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इस निर्णय के बाद डीएसएफ और सहायक आरक्षक अपनी सुविधाओं और प्रमोशन के लिए अन्य प्रशासनिक माध्यमों से आगे बढ़ने पर विचार करेंगे।

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