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पश्चिम बंगाल की फाइनल वोटर लिस्ट की तारीख हो सकती है स्थगित, EC ने बताया– 14 फरवरी तक काम पूरा करना मुश्किल

दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत फाइनल वोटर लिस्ट की समय-सीमा बढ़ाने पर चुनाव आयोग विचार कर रहा है। आयोग ने पहले 14 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने का कार्यक्रम तय किया था।

हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि लोकल लेवल पर लिस्ट लगाना और हर वोटर को रसीद देना लंबी प्रक्रिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन मौजूदा समय-सीमा में पूरी तरह करना मुश्किल है। इसलिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता हो सकती है, अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।

16 दिसंबर को राज्य की फाइनल ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई थी। इस दौरान 58 लाख 20 हजार 898 वोटरों के नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही थी। इस पर आपत्तियों और दावों की अवधि 15 जनवरी से बढ़ाकर 19 जनवरी कर दी गई।

19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस वाले 1.25 करोड़ वोटर्स को अपना नाम जोड़वाने का अतिरिक्त मौका दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल तर्क के आधार पर आम लोगों को परेशान नहीं किया जा सकता, चुनाव आयोग को उनकी परेशानी को समझते हुए काम करना चाहिए।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि SIR केवल यह तय करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल होने के योग्य है या नहीं। इसका किसी का देश निकाला जाना (डिपोर्टेशन) से कोई संबंध नहीं है। आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो।

इससे पहले 4 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि SIR में लगे बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के काम के दबाव को कम करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति पर विचार किया जाए। आयोग ने 26 नवंबर को कहा था कि राजनीतिक दल SIR प्रक्रिया को लेकर जानबूझकर डर का माहौल बना रहे हैं।

फिलहाल, चुनाव आयोग फाइनल लिस्ट जारी करने से पहले प्रशासनिक तैयारी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को पूरा करने के लिए समय बढ़ाने पर विचार कर रहा है।

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