बिलासपुर। पत्नी की आत्महत्या के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के डॉक्टर संजय प्रकाश को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने सत्र न्यायालय से धारा 306 के तहत मिली दोषमुक्ति को रद्द कर दिया। वहीं पत्नी से क्रूरता के मामले में धारा 498-A के तहत मिली तीन साल की सजा को बरकरार रखा है। दोषी डॉक्टर की सजा कितनी होगी, इस पर 26 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
मामला 15 दिसंबर 2012 का है। डॉक्टर की पत्नी रश्मि प्रकाश ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मामले में उनके भाई आशीष नाथ ने सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने 24 सितंबर को दोनों अपीलों पर फैसला सुनाया।
अभियोजन के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच डॉक्टर के एक नर्स से संबंध को लेकर विवाद होता था। आरोप था कि डॉक्टर पत्नी के साथ मारपीट करता था और उसे तलाक देकर नर्स से शादी करने की धमकी भी देता था। गवाहों ने चाबी के गुच्छे से हमला करने और नींद की गोलियां देने की बात भी कोर्ट में कही।
बच्चों की गवाही को कोर्ट ने माना महत्वपूर्ण
मामले की सुनवाई के दौरान बेटे और बेटी ने भी मां के साथ मारपीट की घटनाओं के बारे में गवाही दी। बच्चों ने बताया कि पिता उनकी मां के साथ मारपीट करते थे। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर गवाहों की गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता कि वे मृतका के रिश्तेदार हैं।
लगातार प्रताड़ना और आत्महत्या के बीच संबंध माना
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर पत्नी के साथ मारपीट और प्रताड़ना तथा नर्स से संबंध को लेकर बने हालात को आत्महत्या से जुड़ा माना। कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों का आत्महत्या के फैसले से सीधा और निकट संबंध स्थापित होता है।
हाईकोर्ट ने 28 जून 2016 के सत्र न्यायालय के फैसले में संशोधन करते हुए डॉक्टर को धारा 306 में भी दोषी ठहराया। अब सजा के प्रश्न पर 26 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
