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छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने नई शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों के मुद्रण की प्रतिबद्धता जताई

रायपुर। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण के संबंध में सभी निर्णय नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, एनसीईआरटी मानकों और राज्य शासन एवं एससीईआरटी के निर्देशों के अनुरूप लिए जाने की पुष्टि की है।

कक्षा 1 से 8 तक की पुस्तकों का पाठ्यक्रम पूरी तरह एनसीईआरटी आधारित है। आंतरिक पृष्ठों के लिए 80 जीएसएम टेक्स्ट पेपर और आवरण के लिए 220 जीएसएम कवर पेपर का उपयोग किया जाएगा, जबकि कक्षा 9 और 10 की पुस्तकों के लिए 70 जीएसएम कागज उपयोग में लाया जाएगा। यह प्रावधान एनसीईआरटी, नई दिल्ली और एससीईआरटी रायपुर के बीच अनुबंध के अनुसार है।

निगम ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुसार कक्षा 1 से 8 में विषयों की संख्या बढ़ाकर 144 की गई है, जिससे कागज की आवश्यकता स्वाभाविक रूप से बढ़ी है। पिछले सत्र में 2.65 करोड़ पुस्तकों के मुद्रण के लिए लगभग 11,000 मीट्रिक टन कागज का उपयोग किया गया था और आगामी सत्र में भी इसी मात्रा का अनुमान है।

छात्रों के बस्ते के वजन में वृद्धि को केवल कागज के जीएसएम परिवर्तन से जोड़ना भ्रामक है, क्योंकि बस्ते का वास्तविक वजन पाठ्यक्रम संरचना, विषयों और डिजिटल सामग्री पर निर्भर करता है।

पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निविदा प्रक्रिया में कड़ी शर्तें हैं। केवल अनुभवी और सक्षम कंपनियां ही कागज की आपूर्ति में सहभागी होंगी। निगम ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि हैं और नई शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, स्थायी और पठनीय पाठ्यपुस्तकें समय पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

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