भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिक्षकों ने लंबे समय बाद अपनी एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन किया। शनिवार को 50 हजार से अधिक शिक्षक सड़कों पर उतरे और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आयोजित किया गया।
प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर नई पात्रता परीक्षा थोपना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उनका तर्क है कि उनकी नियुक्ति उस समय के नियमों के अनुसार हुई थी, जब यह व्यवस्था लागू नहीं थी। ऐसे में अब उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर करना उनके अनुभव और सम्मान दोनों के खिलाफ है।
यह आंदोलन Supreme Court of India के उस आदेश के विरोध में है, जिसमें एक मामले में पात्रता परीक्षा को अनिवार्य करने की बात कही गई थी। इसी फैसले के बाद प्रदेशभर के शिक्षक लामबंद हो गए हैं और अलग-अलग जिलों में भी विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं।
संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक जगदीश यादव ने कहा कि जब तक सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी, ताकि शिक्षकों के हितों की रक्षा हो सके।
शिक्षकों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दायर की है। राज्य सरकार भी इस मुद्दे पर शिक्षकों के समर्थन में नजर आ रही है और उसने भी पुनर्विचार याचिका दाखिल की है।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि 25-30 साल का अनुभव रखने वाले शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देना न केवल व्यावहारिक रूप से कठिन है, बल्कि यह उनके आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचाता है। ऐसे में सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
