रायपुर। राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय “छत्तीसगढ़ कॉमन्स कन्विनिंग” कार्यशाला का शुभारंभ हुआ, जिसमें आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने पेसा और एफआरए के बेहतर समन्वय के लिए जल्द टास्क फोर्स गठन की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह टास्क फोर्स मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित होगी, जिसका उद्देश्य पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (PESA) और वन अधिकार अधिनियम (FRA) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संतुलित नीति बनाना है।
कार्यशाला ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में आयोजित हो रही है, जहां “प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स” पहल के तहत विभिन्न संगठनों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान श्री बोरा ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण में कॉमन्स (साझा संसाधन) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और जनजातीय समुदायों का इससे गहरा जुड़ाव है।
उन्होंने कहा कि कार्यशाला में सामने आने वाले निष्कर्ष राज्य के नीति निर्माण में सहायक होंगे। साथ ही सरकार पारंपरिक संस्कृति और विरासत के संरक्षण के लिए एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रही है, जहां लोकगीतों, वाद्य यंत्रों और पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण और कॉपीराइट संरक्षण किया जाएगा।
इस सम्मेलन में 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें नीति विशेषज्ञ, पंचायत प्रतिनिधि, शोधकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। चर्चा का केंद्र राज्य के लगभग 70 लाख एकड़ कॉमन्स संसाधन रहे, जिनमें जंगल, घास के मैदान और जल स्रोत शामिल हैं, जो ग्रामीण और आदिवासी समुदायों की आजीविका का आधार हैं।
कार्यक्रम के अगले दिन मुख्य सचिव विकास शील जनजातीय नीति पर संवाद करेंगे, जबकि समापन सत्र में मंत्री रामविचार नेताम शामिल होंगे। अधिकारियों ने कहा कि सामुदायिक भागीदारी से ही प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सतत विकास संभव है।
