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बंगाल में 20 साल बाद टाटा की वापसी की चर्चा,सिंगूर प्लांट फिर शुरू करने पर शुरुआती बातचीत

दिल्ली। पश्चिम बंगाल के सिंगूर में करीब 20 साल पहले विवादों के चलते बंद हुई टाटा मोटर्स की नैनो परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद टाटा समूह की सिंगूर में संभावित वापसी को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि टाटा ग्रुप से शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है और यदि कंपनी लौटने को तैयार होती है तो सिंगूर की जमीन किसी दूसरी कंपनी को नहीं दी जाएगी।

उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कहा कि सरकार टाटा समूह के साथ लगातार संपर्क में है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी स्वयं इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। सरकार की कोशिश है कि सिंगूर में दोबारा औद्योगिक गतिविधियां शुरू हों, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हों और क्षेत्र का विकास हो सके।

सिंगूर में 2006 में टाटा मोटर्स की नैनो कार फैक्ट्री के लिए किसानों से जमीन अधिग्रहित की गई थी। उस समय जमीन अधिग्रहण के विरोध में बड़ा आंदोलन हुआ, जिसका नेतृत्व ममता बनर्जी ने किया था। लंबे आंदोलन और राजनीतिक विवाद के बाद 2008 में टाटा समूह ने नैनो परियोजना को सिंगूर से हटाकर गुजरात के साणंद स्थानांतरित कर दिया था।

टाटा के जाने के बाद हजारों परिवारों की उम्मीदें टूट गईं। जिन किसानों और परिवारों ने रोजगार व विकास की उम्मीद में जमीन दी थी, वे आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझते रहे। राज्य सरकार के अनुसार, ऐसे करीब 3,600 परिवारों को आज भी हर महीने 2,000 रुपये की आर्थिक सहायता और 16 किलो चावल दिया जाता है।

यदि टाटा समूह की सिंगूर में वापसी होती है, तो इसे पश्चिम बंगाल के औद्योगिक विकास के लिए बड़ा कदम माना जाएगा। साथ ही यह दो दशक पुराने विवाद के बाद उद्योग और निवेश के नए दौर की शुरुआत भी साबित हो सकता है।

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