विकास तिवारी को सांसद प्रतिनिधि पद से हटाया गया, सांसद रंजीता रंजन के कार्यालय से जारी सूचना को कांग्रेस ने किया सार्वजनिक

रायपुर। राज्यसभा सांसद रंजीता रंजन ने विकास तिवारी को अपने सांसद प्रतिनिधि पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई करीब छह महीने पहले की गई थी, लेकिन अब कांग्रेस पार्टी द्वारा इसे सार्वजनिक किया गया है।
सांसद कार्यालय से जारी सूचना सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि विकास तिवारी के खिलाफ संगठनात्मक स्तर पर लगातार कड़ी कार्रवाई की जा रही है। झीरम घाटी नक्सल हमले को लेकर पार्टी लाइन से हटकर दिए गए बयानों के बाद से उनकी मुश्किलें बढ़ती चली गईं।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब विकास तिवारी ने झीरम घाटी हमले को लेकर कांग्रेस और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का नार्को टेस्ट कराने की मांग सार्वजनिक रूप से कर दी। उन्होंने इस संबंध में न्यायिक जांच आयोग को पत्र भी लिखा, जिसमें दोनों दलों के कई नेताओं के नाम शामिल थे। इस कदम को कांग्रेस नेतृत्व ने अनुशासनहीनता और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला माना।
बयान सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने पहले उन्हें वरिष्ठ प्रवक्ता पद से हटा दिया। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार तिवारी का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
इसके बाद कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाते हुए विकास तिवारी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। इस दौरान तिवारी कांग्रेस भवन भी पहुंचे और झीरम घाटी हमले में शहीद नेताओं को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने दावा किया कि उनके पास मामले से जुड़े अहम दस्तावेज हैं और एक लिफाफा कांग्रेस कार्यालय में सौंपा है।
साथ ही उन्होंने एनआईए और झीरम जांच आयोग को पत्र लिखकर नार्को टेस्ट की मांग दोहराई, जिससे कांग्रेस के भीतर असहजता और बढ़ गई। सांसद प्रतिनिधि पद से हटाए जाने की सूचना के सार्वजनिक होने के बाद यह साफ हो गया है कि पार्टी उनके बयानों और गतिविधियों को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई के रास्ते पर है।





