SIR पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई: चुनाव आयोग का कहना- केवल नागरिकता वेरिफाई करने की प्रक्रिया

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मामले पर सुनवाई होगी। बिहार, केरल, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए थे और कई याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों, नागरिकता की पहचान और वोटिंग अधिकार से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
पिछली सुनवाई 13 जनवरी को हुई थी। चुनाव आयोग की ओर से सीनियर वकील राकेश द्विवेदी ने कोर्ट में कहा कि SIR के तहत आयोग सिर्फ यह तय करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने योग्य है या नहीं। इसका उद्देश्य केवल नागरिकता वेरिफाई करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR से किसी का डिपोर्टेशन नहीं होता, क्योंकि किसी व्यक्ति को देश से बाहर निकालने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। द्विवेदी ने संविधान सभा की बहसें और सरबानंद सोनोवाल केस का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में नागरिकता की जांच आवश्यक है।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट में पिछली सुनवाई में मुख्य बिंदु:
- 6 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा कि वोटर लिस्ट को सही और साफ रखना आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। विदेशी नागरिक को वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किया जा सकता।
- 4 दिसंबर: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया कि BLOs (बूथ लेवल अधिकारियों) पर काम का दबाव कम करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।
- 26 नवंबर: चुनाव आयोग ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां SIR प्रक्रिया को लेकर डर का माहौल बना रही हैं।
SIR प्रक्रिया को लेकर कोर्ट की निगाह इस बात पर है कि यह केवल नागरिकता सत्यापन तक सीमित रहे और किसी भी राजनीतिक या दंडात्मक कार्रवाई में न बदले। आज की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं और चुनाव आयोग दोनों की दलीलें सुनी जाएंगी, और कोर्ट के आदेश से SIR की आगे की प्रक्रिया तय होगी।





