सरेंडर नक्सली देवा बारसे ने खोला हिड़मा एनकाउंटर का राज

तेलंगाना। PLGA बटालियन नंबर 1 के पूर्व कमांडर इन चीफ देवा बारसे (49) ने 3 जनवरी को हैदराबाद में अपने 19 साथियों के साथ सरेंडर किया। देवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे जंगल से सरेंडर करने बाहर नहीं निकले थे, बल्कि 29 दिसंबर को संगठन के काम के सिलसिले में तेलंगाना जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। उन्होंने बताया कि करीब चार दिन तक उनसे पूछताछ की गई और 3 जनवरी को उन्हें जबरन सरेंडर कराया गया।
देवा ने हिड़मा के फर्जी एनकाउंटर की पुष्टि करते हुए कहा कि हिड़मा 1997 से नक्सल संगठन में था और वह उसे भाई मानते थे। उन्होंने मनीष कुंजाम के आरोप को गलत ठहराया कि हिड़मा को देवजी ने मारा; असल में पुलिस ने ही हिड़मा की हत्या की। देवा ने बताया कि वह 2025 के अंत तक छत्तीसगढ़ और तेलंगाना बॉर्डर में सक्रिय थे। 27 अक्टूबर तक हिड़मा से उनका संपर्क था।
देवा ने अपने संगठन में भर्ती प्रक्रिया और हथियारों के स्रोत पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बटालियन में 15 साल से ऊपर के लड़कों को ही भर्ती किया जाता था और कोई जबरन शामिल नहीं किया जाता। उन्हें विदेश से हथियार नहीं मिलते; उनके पास इजराइल मेड ‘तावोर’ और अमेरिकन मेड राइफल ‘कोल्ट M4’ थी, जो उन्होंने अपने साथ सरेंडर करते समय लाए।
सरेंडर के बाद देवा ने कहा कि झीरम हमले का राज भी अब उजागर हो सकता है। देवा को 2023 में बटालियन नंबर 1 का चीफ बनाया गया था। इससे पहले वह दरभा डिवीजन का सचिव था। 2013 में झीरम में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर नक्सलियों का हमला इसी बटालियन ने किया था। देवा ने स्पष्ट किया कि वे संगठन में जनता की समस्याओं को देखकर शामिल हुए थे और जनता या समाज प्रमुखों के लिए फिलहाल कोई संदेश नहीं देना चाहते।





