जेल में बंदियों के हाथों संवर रहा हुनर, गणेश प्रतिमा से अचार तक बना रहे उत्पाद

राज्योत्सव में जेल विभाग की प्रदर्शनी बनी आकर्षण; स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा और निश्चय कार्यक्रम से बदल रही जिंदगी

रायपुर। जेल की सलाखों के पीछे बंदियों का हुनर नई पहचान बना रहा है। कोई गणेश और मां दुर्गा की प्रतिमाएं गढ़ रहा है तो कोई अचार, नमकीन, जूट के सामान और एलईडी उत्पाद तैयार कर रहा है।

नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव 2026 में जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग की प्रदर्शनी में बंदियों की इसी रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता की झलक देखने को मिल रही है। यहां प्रदर्शित उत्पाद बता रहे हैं कि जेलों में सजा के साथ सुधार और पुनर्वास पर भी काम हो रहा है।

निश्चय कार्यक्रम से रोजगार का प्रशिक्षण

प्रदर्शनी में युवा बंदियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए चलाए जा रहे ‘निश्चय कार्यक्रम’ को प्रमुखता से दिखाया गया है। इसके तहत बंदियों को फास्ट फूड बनाने, खाद्य सामग्री तैयार करने और अन्य रोजगारमूलक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिला बंदियों द्वारा तैयार अचार और बंदियों के हाथों से बनी गणेश-मां दुर्गा की प्रतिमाएं लोगों का ध्यान खींच रही हैं।

स्टॉल में चित्रकलाओं के साथ जूट उत्पाद, सरसों तेल, नमकीन और एलईडी उत्पाद भी रखे गए हैं। हाथकरघा का चलित मॉडल भी दर्शकों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है।

स्मार्ट क्लास से गीता के 700 श्लोक तक

बंदियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए जेलों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था की जानकारी भी दी गई है। प्रदर्शनी में केंद्रीय जेल रायपुर के युवा बंदी वासुदेव चौहान की उपलब्धि खास चर्चा में है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्यायों के 700 श्लोक कंठस्थ किए हैं।

रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन की तैयारी

प्रदर्शनी में खुली जेल की व्यवस्था और बंदियों के सामाजिक पुनर्वास से जुड़ी पहल भी दिखाई गई है। उद्देश्य है कि बंदियों को ऐसा हुनर और शिक्षा मिले, जिससे रिहाई के बाद वे रोजगार हासिल कर सकें और सम्मान के साथ जीवन शुरू कर सकें। जेल विभाग की यह प्रदर्शनी संदेश दे रही है कि सही अवसर और प्रशिक्षण मिलने पर सलाखों के पीछे भी जिंदगी बदलने की शुरुआत हो सकती है।

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