साहब! नाली का पानी शुद्ध कैसे? भोपाल में सैंपलिंग में बड़ा छल

भोपाल। भोपाल में जल सुनवाई के नाम पर सैंपलिंग में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हर मंगलवार जल सुनवाई के आदेश दिए थे।
भोपाल के 85 वार्डों में भी दो घंटे तक जल सुनवाई की जाती है, लेकिन वार्डों में कर्मचारी सिर्फ 10 मिलीलीटर पानी में 3 बूंद क्लोरीन डालकर जांच कर रहे हैं, जबकि आदेश के अनुसार 11 पैरामीटर पर जांच अनिवार्य है।
मीडिया की पड़ताल में सामने आया कि टीडीएस, रंग, स्वाद और अन्य पैरामीटर की जांच नहीं हो रही। इसके बावजूद कर्मचारी पानी को शुद्ध बताकर लोगों को रवाना कर देते हैं।
शहर के 20 से ज्यादा इलाकों में अभी भी गंदे पानी की शिकायतें हैं। रियलिटी चेक में कर्मचारी ने 15 सेकंड में ही नाली के पानी को शुद्ध घोषित किया।
निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि लैब में पूरी टेस्टिंग कराई जाए और बाकी पैरामीटर पर भी जांच की जाए।
जनवरी में हुई तीन जल सुनवाई में 6519 सैंपल लिए गए, जिनमें अधिकांश को शुद्ध बताया गया, जबकि वास्तविक जांच केवल क्लोरीन पर हुई। खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर में कुछ सैंपल फेल हुए थे, जिसमें ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला।
नागरिकों ने बताया कि प्रेम नगर और ऐशबाग समेत कई इलाकों में गंदा पानी सप्लाई हो रहा है, लेकिन निगम की सुनवाई नहीं हो रही। महापौर हेल्पलाइन (155304) और सीएम हेल्पलाइन के जरिए शिकायत करने पर ही जांच संभव है।





