शिर्डी। वैश्विक स्तर पर ईंधन की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति के संकट के बीच शिर्डी स्थित श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट ने ऊर्जा बचत की एक मिसाल पेश की है। संस्थान का ‘सोलर कुकिंग सिस्टम’ न केवल हजारों श्रद्धालुओं का पेट भर रहा है, बल्कि रोजाना 200 किलो गैस की बचत कर पर्यावरण और खजाने दोनों की रक्षा कर रहा है।
दुनिया का यूनिक मॉडल: 73 सोलर डिश से कमाल
शिर्डी के साईं प्रसादालय में प्रतिदिन औसतन 40 हजार श्रद्धालु भोजन करते हैं। इतने बड़े पैमाने पर खाना पकाने के लिए पहले भारी मात्रा में एलपीजी (LPG) की जरूरत पड़ती थी।
- तकनीक: संस्थान ने प्रसादालय की छत पर 73 सोलर डिश लगाई हैं। ये डिश सूरज की किरणों को केंद्रित कर भाप (Steam) पैदा करती हैं, जिससे खाना पकता है।
- क्षमता: यहाँ 150 लीटर क्षमता के 10 बड़े सोलर कुकर लगाए गए हैं। इनमें एक समय में 15 क्विंटल चावल और 10 क्विंटल दाल-सब्जी तैयार की जा सकती है।
17 साल में करोड़ों की बचत
यह प्रोजेक्ट जुलाई 2009 में करीब 1.37 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया था। तब से लेकर 2026 तक इस सिस्टम ने शानदार परिणाम दिए हैं:
- गैस की बचत: अब तक 2 लाख किलो से अधिक गैस बचाई जा चुकी है।
- आर्थिक लाभ: संस्थान ने ईंधन मद में 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की सीधी बचत की है।
- गर्म पानी की सुविधा: भोजन के अलावा सौर ऊर्जा से ही श्रद्धालुओं के निवास स्थानों पर 24 घंटे मुफ्त गर्म पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार ने दिया ‘यूनिक मॉडल’ का दर्जा
भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने शिर्डी के इस प्रोजेक्ट को देश के सबसे सफल और ‘यूनिक मॉडल’ के रूप में सम्मानित किया है। यह मॉडल दर्शाता है कि कैसे धार्मिक संस्थान अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
ईरान-इजराइल संघर्ष जैसे अंतरराष्ट्रीय संकटों के कारण जब गैस और पेट्रोल के दाम बढ़ने की आशंका है, तब शिर्डी का यह ‘ग्रीन किचन’ पूरे देश के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
