जांजगीर-चांपा

Self reliance: यहां महिलाएं बनी आत्मनिर्भर, खुद से कर रही जैविक खाद का निर्माण, पेश की मिसाल

लाला उपाध्याय@जांजगीर-चांपा। (Self reliance)जिले के चन्द्रपुर विधानसभा  क्षेत्र  के अंतर्गत ब्लॉक डभरा के ग्राम

पंचायत पुटीडीह के प्रगति महिला स्व सहायता समूह में  12 सदस्य है।

जिसमें हेमलता माहेश्वरी चंद्रिका फूल बाई, अहिल्या, गीता, लीला, पदमा, राखी,

वेदिका, शारदा, विमला, शेलबाई द्वारा समिति का गठन कर समूह बनाया गया।

(Self reliance)सदस्यों द्वारा बैक खाता खोलकर हर महीने रकम जमा करते रहे।

(Self reliance)उस रकम से  पिछले 10 महीने से अपने निजी संसाधन से जैविक खाद  बनाया जा रहा हैं।

जिसमें महिलाओं  के द्वारा आसपास के लोगों से गांव में जाकर गोबर को खरीद कर बना रहे हैं।

महिला समूह द्वारा तैयार जैविक खाद की बिक्री शुरू नहीं हुई है।

खाद को आसपास गांव के किसान को जैविक खाद के उपयोग के बारे में समझा रहे हैं।

अब पिछले 10 माह से गांव में बने सरकारी गौठान में जैविक खाद स्वयं की राशि से बना रहे हैं।

गौरतलब है कि ब्लॉक डभरा के अंतर्गत ग्राम पंचायत पुटीडीह में शासन द्वारा मनरेगा के तहत गौठान का निर्माण कराया गया है।

जहां महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए गौठान में गोबर से जैविक खाद बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।

आज ग्राम पंचायत पुटीडीह के प्रगति महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों ने आगे आकर निजी राशि लगाकर जैविक

खाद बना रहे हैं।

जबकि महिला समूह के द्वारा अभी शुभारंभ में कम लागत 50 हजार रुपए से जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया गया है।

अभी कोई सरकारी मदद नहीं मिला है।

न ही कोई सरकारी प्रशिक्षण मिला है।

फिर भी प्रगति महिला समूह के द्वारा जैविक खाद को बनाते हैं।

जिसमें गोबर को 8 दिनों तक टंकी में भर कर रखते हैं।

फिर टंकी में केंचुआ डालते हैं।

 इसके कुछ दिन बाद जैविक खाद तैयार होता है।
 लॉक डाउन होने के कारण अभी तक खाद बिक्री नहीं हुआ है।
फिर भी अपने निजी खर्चे से कर रहे हैं।
 महिला समूह को खाद बिक्री से आमदनी अभी नहीं हुआ हैं।
आर्थिक संकट होने के बाद लगातार जैविक खाद को पैकेट बनाकर रख रहे हैं।
 इसके बाद भी महिला समूह के सदस्यों ने हिम्मत नहीं हारी।

 

कोरोना के समय भी नहीं हारी हिम्मत

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जैविक खाद  बनाते रहे।

अब भी गांव के किसानों से गोबर खरीद कर बना रहे हैं।

साथ ही बच्चों की पढ़ाई व परिवार का खर्च चला रहे हैं।

जबकि राज्य सरकार द्वारा हरेली त्योहार के दिन न्याय गोधन योजना के तहत  20 जुलाई को पशु पालकों से गोबर खरीदी  का शुभारंभ किया गया है।

तब गौठान के समिति द्वारा 2 रुपए प्रति किलो खरीदा जा रहा है।

गांव के ग्रामीणों से समिति के माध्यम से हर रोज 2 क्विंटल गोबर खरीद करते हैं।

परंतु अभी वर्तमान में ग्राम पंचायत पुटीडीह द्वारा इन महिला समूह को कोई जिम्मेदारी नही दी गई है।

बनाया जा रहा जैविक खाद

गांव के गौठान में खुद के खर्चे पर महिला समूह द्वारा गोबर खरीद कर जैविक खाद बनाया जा रहा है

जबकि प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल द्वारा चलाई जा रही

इस योजना से अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

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जैविक खेती को बढ़ावा ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर,
गौ पालन एवं गौसुरक्षा को प्रोत्साहन के साथ-साथ
पशुपालकों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
गोधन न्याय योजना से गांव अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी।
पशुधन विचरण एवं खुली चराई पर रोक लगेगी।
जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, खरीफ एवं रबी फसल सुरक्षित रहेगी।
स्थानीय स्तर पर स्व सहायता समूहों को रोजगार मिलेगा।
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इससे  गोबर संग्राहकों, से गोठानों मे 2 रूपए प्रति किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है।

जैविक खाद से  हर किसान को लाभ मिलेगा। जमीन बंजर नहीं होंगी।

रासायनिक खाद का उपयोग कम होगा।

परंतु यहां सब उल्टा साबित हो रहा है।

इन महिला समूह को ग्राम पंचायत द्वारा कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है

इस बारे में  प्रगति  स्व सहायता समूह के अध्यक्ष हेमलता माहेश्वरी ने कहा कि हमारे समिति के सभी सदस्यों के द्वारा

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10 महीनों से निजी रुपए लगाकर किसानों से गोबर खरीद कर जैविक खाद गोदान में बना रहे हैं।

गांव में  प्रतिदिन लगभग  2 से 3 क्विंटल तक हर रोज  खरीदी  की जाती है।
इस गोबर से हम लोग  वर्मी कंपोस्ट  बनाने की टैंक में डालकर  जैविक खाद बनाते हैं।
जिससे जैविक खाद से किसानों को इसका लाभ मिलेगा।

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