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जशपुर में सरहुल की धूम: मांदर की थाप पर थिरके मुख्यमंत्री साय, बोले- जनजातीय संस्कृति को संजोना हम सबकी जिम्मेदारी

जशपुरनगर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय गुरुवार को जशपुर के दीपू बगीचा में आयोजित पारंपरिक ‘सरहुल महोत्सव’ में शामिल हुए। प्रकृति पर्व के उत्साह के बीच मुख्यमंत्री ने धरती माता, सूर्य देव और साल (सरई) वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान परंपरा के अनुसार बैगा (पुजारी) ने मुख्यमंत्री के कान में सरई का फूल खोंसकर उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया।

प्रकृति और जीवन के संतुलन का प्रतीक है सरहुल

जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता और सामूहिक जीवन मूल्यों की अभिव्यक्ति है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनजातीय समाज की यह समृद्ध सभ्यता हमारी विशिष्ट धरोहर है, जिसे सहेजकर रखना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को हिंदू नववर्ष की भी शुभकामनाएं दीं।

सरकार की उपलब्धियों का किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में अपनी सरकार के कार्यकाल का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि:

  • महतारी वंदन योजना: महिलाओं के खातों में अब तक 25 किश्तों में 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है।
  • धान खरीदी: किसानों को उनकी मेहनत का फल देते हुए 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है।
  • धर्म स्वातंत्र्य विधेयक: विधानसभा में पेश नए कानून को उन्होंने सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा और अवैध धर्मांतरण पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ा कदम बताया।

100 से अधिक महिलाओं ने पेश किया मनमोहक नृत्य

उत्सव के दौरान मांदर की थाप पर पारंपरिक वेशभूषा में सजी 100 से अधिक महिलाओं और युवतियों ने भव्य सरहुल नृत्य प्रस्तुत किया। पूरा परिसर जनजातीय लोकगीतों और संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।

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