छत्तीसगढ़धमतरी

छत्तीसगढ़ के इस गांव में सात दिन पहले मनाई जाती है होली, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे आप

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी के सेमरा गांव में होली के दिन न गुलाल उड़ता है, न कोई किसी को रंग लगाता है. इस दिन यहां फाग गीत भी नहीं गाया जाता. ये सबकुछ सेमरा में उत्सव के सात दिन पहले कर लिया जाता है. यानी, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन पिचकारी और रंग गुलाल की दुकानें सजती हैं. घरों में पकवान बनते हैं. गांव की गलियों में बच्चे, बूढ़े और युवा मिल कर होली खेलते हैं. गलियों और चौपालों में चारों तरफ रंगो में रंग जाता है.

उस दिन होली जैसा ही होता है अहसास

सेमरा गांव में होली के सात दिन पहले नगाड़ों की थाप गूंजती है. यहां छत्तीसगढ़िया फाग गीत गाए जाते हैं. सिर्फ होली ही नहीं, बल्कि हर पर्व यहां इसी तरह सात दिन पहले मनाया जाता है. सेमरा के ध्रुव सिन्हा और मुरारी निषाद बताते हैं कि गांव की बेटियां जो शादी के बाद ससुराल जा चुकी होती हैं, वो भी अपने मायके आकर होली मनाती हैं. सेमरा में उस वक्त सचमुच लगता है कि उसी दिन होली है.

इस देवता से है परंपरा का संबंध

गौरतलब है कि ये रिवाज जितना अनूठा है, उतना ही हैरान करने वाला भी है. इसका संबंध गांव के देवता सिदार देव से जुड़ा है. गावं के योगेश्वर निषाद और भरत कुमार बताते हैं कि बहुत पहले जब गांव में विपदा आई थी. तब गांव के मुखिया को ग्राम देवता सिदार देव सपने में आए थे. देव ने उन्हें आदेश था कि आज के बाद हर त्योहार और पर्व सात दिन पहले मनाना. अगर ऐसा नहीं किया तो गांव में फिर कोई न कोई विपदा आएगी.

सचमुच आने लगी विपदा

शुरू में लोगों ने इस बात को नहीं माना और परंपरागत रूप से त्योहार मनाने लगे. लेकिन, ग्रामीण बताते हैं कि उसके बाद गांव में सच में संकट आने लगे. कभी बीमारी तो कभी अकाल पड़ने लगा. तब ग्रामीणो ने सपने वाली बात का पालन करने का फैसला किया और तब से ही ये परंपरा चली आ रही है. गांवो के बुजुर्गो के कहने पर युवा भी इस परिपाटी का पालन करते हैं. अब ये परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है.

Related Articles

Back to top button