चांद और मंगल पर मानव बस्ती का रोडमैप तैयार, इसरो दे रहा अंतरिक्ष सपनों को नई उड़ान

दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आने वाले 40 वर्षों के लिए महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है, जिसमें चांद और मंगल पर इंसानी बस्ती बनाने की योजनाएं शामिल हैं। इस रोडमैप के तहत 2047 तक चांद पर इंसानों के रहने लायक ठिकाना तैयार किया जाएगा। यहां खनिज और अन्य संसाधनों की खुदाई होगी, मानवयुक्त वाहन काम करेंगे और ईंधन भंडारण केंद्र बनाए जाएंगे ताकि लंबे समय तक अंतरिक्ष मिशनों में मदद मिल सके।

इसरो ने लद्दाख के त्सो कर घाटी में ‘हिमालयन आउटपोस्ट फॉर प्लैनेटरी एक्सप्लोरेशन (HOPE)’ तैयार किया है। यह स्थान समुद्र तल से 4530 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, और अत्यधिक ठंड, कम आक्सीजन और सूखे वातावरण के कारण चांद और मंगल जैसी परिस्थितियों का अनुभव कराता है। यहां भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों के लिए जीवन-रक्षक प्रणालियों और तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2023 में अंतरिक्ष क्षेत्र के दीर्घकालिक लक्ष्यों की रूपरेखा दी थी। उन्होंने 2025 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाने और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री भेजने का लक्ष्य रखा। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने इसरो के वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के रहस्यों की खोज और गहरे अंतरिक्ष में मानवता के लाभ के लिए मिशनों की योजना बनाने का निर्देश दिया।

दूसरी ओर, स्पेस एक्स के सीईओ एलन मस्क ने मंगल पर मानव बस्तियां बसाने के अपने मिशन के बारे में बड़े दावे किए हैं। उनका कहना है कि अगले 30 वर्षों में इंसान मंगल पर बसना शुरू कर देगा। उनके अनुसार, बिना चालक वाला मिशन पांच साल में, जमीन पर लोगों को उतारने वाला मिशन 10 वर्षों में, 20 वर्षों में एक बस्ती और 30 वर्षों में मंगल पर सभ्यता के रहने की शुरुआत संभव है। इसरो का यह रोडमैप भारत के अंतरिक्ष सपनों को नई उड़ान देगा और भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर इंसानी उपस्थिति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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