जिंदा महिला को मृत बताकर राशन कार्ड किया निरस्त, मोहम्मद अकबर ने मांगी जांच

पूर्व खाद्य मंत्री बोले- दो साल में 1.17 लाख से ज्यादा कार्ड रद्द, सभी मामलों की हो समीक्षा; साकरा बानो का कार्ड बहाल करने की मांग

रायपुर। सरकारी रिकॉर्ड में जीवित महिला को मृत दर्ज कर उसका अंत्योदय राशन कार्ड निरस्त करने का मामला सामने आया है। पूर्व खाद्य मंत्री और कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने रायपुर के सुभाष नगर निवासी साकरा बानो का मामला उठाते हुए जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने महिला का राशन कार्ड दोबारा चालू करने के साथ पिछले दो साल में निरस्त किए गए सभी राशन कार्डों की समीक्षा कराने की मांग भी की है।

मोहम्मद अकबर के मुताबिक, साकरा बानो जीवित हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया। इसके बाद उनका अंत्योदय राशन कार्ड निरस्त हो गया और राशन मिलना बंद हो गया। अकबर ने वीडियो जारी कर मामले की जानकारी दी। वीडियो में महिला राशन कार्ड से जुड़े दस्तावेज दिखाते हुए अपनी समस्या बता रही है। महिला के पति का नाम मोईनुद्दीन है, जिनका निधन हो चुका है।

अकबर ने कहा कि यह केवल सरकारी रिकॉर्ड में गलती का मामला नहीं है, बल्कि इससे एक गरीब परिवार खाद्य सुरक्षा के लाभ से वंचित हो गया है।

दो साल में 1.17 लाख से ज्यादा कार्ड निरस्त

मोहम्मद अकबर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2024 में 57,371 और 2025 में 60,496 राशन कार्ड निरस्त किए गए। इस तरह दो साल में कुल 1,17,867 कार्ड निरस्त हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में कार्ड रद्द करने से पहले क्या सभी मामलों की उचित जांच की गई थी? क्या प्रभावित परिवारों को अपनी बात रखने का मौका मिला?

प्रदेश में 83.33 लाख राशन कार्ड

अकबर के अनुसार, प्रदेश में फिलहाल 83.33 लाख राशन कार्ड हैं, जिनमें 274.04 लाख सदस्य पंजीकृत हैं। वर्ष 2025 की अनुमानित 3.08 करोड़ आबादी के आधार पर करीब 89 प्रतिशत लोगों तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ सभी पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रक्रिया पारदर्शी होना जरूरी है।

खाद्य मंत्री से कार्रवाई की मांग

पूर्व मंत्री ने खाद्य मंत्री से साकरा बानो के मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और महिला का राशन कार्ड बहाल करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने पिछले दो वर्षों में निरस्त किए गए सभी राशन कार्डों की समीक्षा करने की बात कही।

उनका कहना है कि यह जांच होनी चाहिए कि कहीं सरकारी रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज होने के कारण अन्य पात्र परिवारों का राशन तो बंद नहीं किया गया। उन्होंने सरकार से ऐसी गलतियों को रोकने और जरूरतमंदों तक खाद्य सुरक्षा का लाभ सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

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