रामअवतार जग्गी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट में अमित जोगी की याचिकाएं टैग, 23 अप्रैल को संयुक्त सुनवाई

दिल्ली। चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में सजा पाए पूर्व विधायक अमित जोगी की ओर से दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं लंबित थीं, जिन्हें अब एक साथ टैग कर दिया गया है। मामले की अगली संयुक्त सुनवाई 23 अप्रैल को तय की गई है।

सुनवाई के दौरान एक याचिका हाईकोर्ट के आदेश के तहत सरेंडर पर रोक से संबंधित थी, जिसे चैंबर में दाखिल किया गया था, जबकि दूसरी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरेंडर पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी जाएगी और इस पर निर्णय चैंबर जज द्वारा लिया जाएगा। साथ ही अदालत ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए।

मृतक रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के वकील भी अदालत में मौजूद रहे और उन्होंने अपना पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अमित जोगी ने बताया कि उनकी दोनों याचिकाओं—लीव टू अपील और हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ वैधानिक अपील—को एक साथ सुना जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा, सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग ने पैरवी की। अमित जोगी ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि वे कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह सम्मान करेंगे।

गौरतलब है कि यह मामला वर्ष 2003 का है, जब एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में कई आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। बाद में विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, जिसे चुनौती देते हुए मामला उच्च न्यायालय और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अब 23 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले में आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।

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