राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की अस्मिता एवं पहचान – सीएम साय

राजिम में सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला हेतु 50 लाख रुपये की घोषणा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजिम में आयोजित राजिम कुंभ कल्प 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ कल्प केवल धार्मिक मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और पहचान का प्रतीक पर्व बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राजिम में सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने राजिम बैराज का कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने और पूर्व में प्रस्तावित विकास कार्यों को तेज गति से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य मंच पर भगवान राजीव लोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की तथा छत्तीसगढ़ महतारी और भारत माता के जयघोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम की यह पावन भूमि सदियों से तप, त्याग और साधना की साक्षी रही है। “छत्तीसगढ़ का प्रयाग” कहलाने वाला राजिम अपनी आध्यात्मिक गरिमा के कारण देशभर में विशेष स्थान रखता है। महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव त्याग, संयम और सेवा के प्रतीक हैं, जिनका संदेश समाज को संतुलन और समर्पण का मार्ग दिखाता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मेले के दौरान श्रद्धालुओं के लिए आवागमन, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य सेवा, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में राजिम कुंभ मेला स्थल को और अधिक सुव्यवस्थित व भव्य बनाया जाएगा तथा इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित आध्यात्मिक आयोजन के रूप में विकसित किया जाएगा।
कार्यक्रम में खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।





