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Raigarh: पूंजीपथरा इंडस्ट्रियल पार्क के 42 प्लांट की टूटी कमर, सभी बंद होने के कगार पर,रायगढ़ इस्पात उद्योग संघ जिंदल गेट पर करेगा आर्थिक नाकेबंदी

नितिन@रायगढ़। पूंजीपथरा इंडस्ट्रियल पार्क के 42 प्लांट बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसे में 10,000 प्लांट कर्मियों की नौकरी भी दांव पर लग गई है। इन प्लांटों को बिजली आपूर्ति नहीं की जा रही है। रायगढ़ इस्पात संघ ने जेएसपीएल को चेतावनी देते हुए कहा कि अब वे आर पार की लड़ाई को तैयार है। संघ जिंदल प्लांट के सामने धरना प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी करने वाले हैं।

जेएसपीएल द्वारा स्थापित पूंजीपथरा इंडस्ट्रियल पार्क के उद्योग इन दिनों पावर कट की समस्या से जूझ रहे हैं । जिंदल ने 50 दिनों से इन उद्योगों की बिजली काट दी है। रायगढ़ इस्पात उद्योग संघ के सदस्यों ने आज पत्रकारवार्ता कर बताया कि पूंजीपथरा इंडस्ट्रियल पार्क में हर साल पावर कट की समस्या उत्पन्न की जाती है। जब जब बिजली दरों में इजाफा होता है तब तब जिंदल बिजली कट कर उद्योगों का उत्पादन ठप करने की कोशिश करता है। जिंदल अपने मनमाने दर पर बिजली की सप्लाई देना चाहता है। जबकि बिजली की दर नियामक आयोग तय करता है बावजूद इसके जिंदल अपनी मनमानी वर्षों से कर रहा है। सीएम से लेकर कलेक्टर और उद्योग सचिव तक ने जिंदल प्रबंधन को तत्काल बिजली सप्लाई चालू करने और अपना बिजली दर नियामक आयोग में पेश करने का निर्देश दिया है, बावजूद इसके जिंदल प्रबंधन अपनी मनमानी पर उतारू है। 72 घंटे में 8 घंटे की बिजली प्लांटों को दी जा रही है ऐसे में उद्योग पूरी तरह से ठप हो गए हैं, यदि ऐसा ही कुछ दिन और चलता रहा तो इंडस्ट्रियल पार्क के सारे उद्योग बंद हो जाएंगे। इससे यहां काम करने वाले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 10000 लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

वही उद्योगों के चलने से जीएसटी के रूप में जो करोड़ों का रेवेन्यू सरकार को मिलता है वह भी नहीं मिलेगा। सरकार के नुकसान के साथ उद्योगपतियों का नुकसान और काम करने वाले कर्मचारी का भी नुकसान होगा। इस साल 50 दिनों के पावर कट से उद्योगपतियों की कमर टूट गई है। जिंदल की मनमानी से संघ ने आर पार की लड़ाई शुरू करने का मन बना लिया है।

28 अप्रैल तक की दी गई समय सीमा

जिंदल को 28 अप्रैल तक की समय सीमा दी गई है। इसके बाद हमारा प्लांट नहीं चलेगा तो वे जिंदल का भी प्लांट नहीं चलने देंगे। संघ ने कहा कि वे जिंदल प्लांट के सामने धरना प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी करेंगे जिसके लिए जिंदल प्रबंधन जिम्मेदार होगा

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