दलहन में कारोबार सुस्त, चना, मूंग और तुवर में मंदी, मंडी में आवक भी कमजोर

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले की छावनी अनाज मंडी में गुरुवार को दलहन कारोबार पर दबाव साफ नजर आया। नाफेड द्वारा 2025-26 सीजन के चने की बिक्री की घोषणा के बाद बाजार में तेजी से सुस्ती फैल गई है। इसके साथ ही चना, मूंग और तुवर जैसे प्रमुख दलहन में न केवल दामों में गिरावट दर्ज की गई, बल्कि खरीदारी भी काफी कमजोर रही। मंडी में आवक कम होने से व्यापारिक गतिविधियां और धीमी पड़ गईं।

व्यापारियों के अनुसार नाफेड के इस निर्णय का सबसे अधिक असर चना बाजार पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि बड़ी मात्रा में स्टॉक बाजार में आने से निकट अवधि में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका सीधा फायदा दाल मिलों को सस्ता माल मिलने के रूप में दिखाई दे रहा है, लेकिन किसानों और स्टॉकिस्टों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश के बाजारों पर इसका प्रभाव अधिक देखने को मिल रहा है, जबकि मसूर और सोयाबीन पर असर सीमित बताया जा रहा है।

इंदौर मंडी में चना कांटा 50 से 100 रुपये गिरकर 6000 रुपये प्रति क्विंटल और विशाल चना 5900 से 5950 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया। वहीं मूंग और तुवर में भी लगभग 100 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। मूंग में हल्की और मीडियम क्वालिटी की आवक अधिक होने से भावों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।

हालांकि काबुली चने में मांग मजबूत रहने से कुछ तेजी देखने को मिली और इसकी आवक करीब 2500 बोरी रही। अन्य दलहन में कारोबार सामान्य और भाव लगभग स्थिर बने रहे।

इसके अलावा गेहूं, मक्का और अन्य अनाजों के भाव में भी हल्की स्थिरता देखी गई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का रुझान कमजोर ही रहा। व्यापारियों का कहना है कि जब तक नाफेड की बिक्री और सरकारी नीतियों को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक दलहन बाजार में उतार-चढ़ाव और सुस्ती का दौर जारी रह सकता है।

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