दिल्ली। 2,000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 15 अक्टूबर से प्रस्तावित 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक यह शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा और MDR से मिलने वाली राशि सरकारी खजाने में भी नहीं जाएगी। यह रकम UPI सिस्टम से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी।
सरकार ने विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया है, जिसमें MDR को ग्राहकों पर लगाया जाने वाला टैक्स बताया गया था। सूत्रों के मुताबिक MDR न टैक्स है, न सेस और न ही सरचार्ज। सरकार ने दोहराया कि UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
चार हिस्सों में बांटी जाएगी रकम
प्रस्तावित MDR में मिलने वाली राशि को चार हिस्सों में बांटने की व्यवस्था बताई गई है। इसमें 40% हिस्सा ग्राहक के बैंक को मिलेगा। 30% पेमेंट गेटवे, 20% UPI ऐप और 10% राशि UPI ऐप के प्रायोजक बैंक को दी जाएगी।
2 अक्टूबर को व्यापारी करेंगे विरोध
UPI पर प्रस्तावित MDR के विरोध में देशभर के व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान किया है। इस दौरान व्यापारी QR कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और अन्य डिजिटल पेमेंट डिवाइस को काले कपड़े से ढककर विरोध जताने की तैयारी कर रहे हैं। व्यापारियों की मांग है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाला शुल्क वापस लिया जाए।
बड़े और छोटे व्यापारियों के लिए अलग नियम
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार महीने में UPI से 1 लाख रुपए तक की कुल कमाई वाले छोटे व्यापारियों पर MDR नहीं लगेगा।
1 लाख रुपए से अधिक मासिक UPI कलेक्शन वाले बड़े व्यापारियों को 2,000 रुपए से ज्यादा के प्रत्येक पेमेंट पर 0.4% MDR देना होगा। 2,000 रुपए तक के भुगतान पर शुल्क नहीं होगा।
75 हजार रुपए या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम 300 रुपए+GST शुल्क की सीमा बताई गई है। वहीं, पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल पेमेंट, टेलीकॉम, बीमा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपए से अधिक के भुगतान पर 5 रुपए की फ्लैट फीस प्रस्तावित है।
