नई दिल्ली। दिल्ली सरकार तिहाड़ जेल को शहर से बाहर शिफ्ट करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 2025-26 के लिए पेश किए गए दिल्ली के बजट में इस योजना का जिक्र किया है। तिहाड़ जेल में कैदियों की संख्या अब बहुत ज्यादा हो गई है, और इसे शहर से बाहर शिफ्ट करने से कैदियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
इसके लिए 10 करोड़ रुपये का बजट सर्वे और एडवाइजरी पर खर्च किए जाएंगे। तिहाड़ जेल की वर्तमान क्षमता 10,000 कैदियों की है, लेकिन यहां पर 19,000 से ज्यादा कैदी हैं। जेल के विभिन्न हिस्सों में इस समय कैदियों की भीड़ बहुत ज्यादा है, जैसे जेल नंबर 1 से 9 में 12,000 से ज्यादा कैदी हैं, जबकि इनकी क्षमता केवल 5,000 कैदियों की है।
बपरौला में जगह मांगी जेल प्रशासन ने
सूत्रों के मुताबिक, तिहाड़ जेल को शिफ्ट करने के लिए बपरौला में जगह मांगी गई थी, लेकिन वहां अतिक्रमण की वजह से जमीन नहीं मिल पाई। अब दिल्ली सरकार से 100 एकड़ जमीन की मांग की गई है। इसके अलावा, तिहाड़ जेल को दो मंजिला बनाने का भी प्रस्ताव है, जिससे इसकी क्षमता तीन गुना बढ़ सकती है।
कैदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए योजना
मुख्यमंत्री ने बजट में यह भी घोषणा की है कि दिल्ली में एक सोसाइटी का गठन किया जाएगा, जो जेलों में कैदियों के सुधार और पुनर्वास पर काम करेगी। इस सोसाइटी के तहत कैदियों को जेल के अंदर काम करने के लिए तैयार किया जाएगा, और उनके बनाए गए उत्पादों को सरकारी विभागों और मंत्रालयों द्वारा खरीदा जाएगा।
तिहाड़ जेल में कैदियों पर खर्च
तिहाड़ जेल में एक कैदी पर रोजाना 800 रुपये खर्च होते हैं, यानी हर महीने एक कैदी पर 24,000 रुपये का खर्च आता है। दिल्ली जेल के डायरेक्टर जनरल संजय बेनीवाल ने बताया कि इस खर्च का एक हिस्सा कैदियों के सुधार और उनके पुनर्वास पर लगाया जा रहा है। इस योजना से तिहाड़ जेल में कैदियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है, साथ ही जेल के भीतर उनके सुधार और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे।