रायपुर। देश में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। केंद्र सरकार 2023 में पारित कानून को 2029 से लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें इस पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
इस बदलाव का बड़ा असर छत्तीसगढ़ की राजनीति पर भी पड़ेगा। 90 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल 19 महिला विधायक हैं, जो करीब 21 प्रतिशत है। लेकिन 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने के बाद यह संख्या बढ़ाकर कम से कम 30 करनी होगी। यानी 11 नई महिला विधायकों की जरूरत पड़ेगी, जो राजनीतिक दलों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
राज्य में महिला प्रतिनिधित्व धीरे-धीरे बढ़ा है, लेकिन अब तक लक्ष्य से पीछे रहा है। 2003 में केवल 6 महिला विधायक थीं, जो 2013 में 12, 2018 में 16 और 2023 में 19 तक पहुंचीं। अब अचानक इस संख्या को तेजी से बढ़ाना होगा, जिससे चुनावी रणनीति पूरी तरह बदल सकती है।
आरक्षण लागू होने के बाद राजनीतिक दलों को एक-तिहाई सीटों पर महिला उम्मीदवार उतारना अनिवार्य होगा। इससे कई मौजूदा पुरुष नेताओं की सीटें प्रभावित हो सकती हैं और “सेफ सीट” की राजनीति कमजोर पड़ेगी। साथ ही ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में नए महिला नेतृत्व को उभारने की जरूरत बढ़ेगी।
लोकसभा स्तर पर भी बदलाव दिखेगा। राज्य की 11 सीटों में फिलहाल 3 महिला सांसद हैं, लेकिन आरक्षण लागू होने के बाद यह संख्या कम से कम 4 करनी होगी।
यदि भविष्य में परिसीमन होता है, तो विधानसभा सीटें 110-120 तक बढ़ सकती हैं, जिससे महिलाओं के लिए करीब 40 सीटें आरक्षित होंगी। वहीं लोकसभा सीटें 16-18 होने पर 5-6 सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित हो सकती हैं।
