रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क से जुड़े कथित सट्टा किंग नमन जग्गी के खिलाफ कार्रवाई के दो महीने बाद भी पुलिस उसके पूरे नेटवर्क तक नहीं पहुंच पाई है। मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ चालान कोर्ट में पेश किया जा चुका है, लेकिन जांच के दौरान सामने आए 9 नामजद आरोपी अब भी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश मोबाइल लोकेशन, डिजिटल ट्रेल और वित्तीय लेनदेन के आधार पर कर रही है।
मामला 5 मई 2026 का है, जब रायपुर पुलिस ने 36 मॉल, तेलीबांधा के पास घेराबंदी कर नमन जग्गी को कार से गिरफ्तार किया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि वह Gold777 की आईडी बेचकर क्रिकेट मैचों पर ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहा है। मौके से उसके पास दो मोबाइल फोन और नकदी बरामद हुई थी।
पूछताछ में नमन जग्गी ने कबूल किया कि वह पिछले दो वर्षों से ऑनलाइन सट्टा आईडी बेचने का काम कर रहा था और हर रुपये पर 50 पैसे तक कमीशन लेता था। जांच में सामने आया कि वह Gold777, Silverbet777.club, JMDBet777.com और AllPanelExch9.co जैसे चार अलग-अलग ऑनलाइन सट्टा पैनल के जरिए आईडी उपलब्ध कराता था। इसके अलावा Diamond Book नाम के एक अन्य पैनल का भी इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस ने मौके से आयुप जैन और सरफराज उर्फ सैफ को भी गिरफ्तार किया था। आयुप जैन के मोबाइल की जांच में सामने आया कि वह ऑनलाइन पैनल में हैकर के जरिए पॉइंट बढ़ाने का काम करता था और इसके एवज में 15 प्रतिशत तक कमीशन लेता था।
इन आरोपियों को किया गया गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा। इनमें नमन जग्गी, आयुप जैन, सरफराज मामदानी, अंकित अग्रवाल, लिकेश्वर साहू, लखन थावरानी, आकाश सिंह राजपूत, निशात हसीजा, प्रदीप पटेल, हितेश दलवानी, सुबोध राम, राहुल शुक्ला, अमन नथानी और राम लालवानी शामिल हैं। पूछताछ में गलत जानकारी देने पर आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 212 भी जोड़ी गई।
इन आरोपियों की तलाश जारी
जांच के दौरान पुलिस के सामने नेटवर्क से जुड़े 9 अन्य नामजद आरोपी भी आए, जो अब तक गिरफ्त से बाहर हैं। इनमें मोहसीन, सौरभ जैन, बाबू गावली, सागर अड़वानी, चंदन, गोलू अलमास, जयेश भैया, अमित (नागपुर) और राज गुप्ता (भिलाई) शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि यही लोग विभिन्न राज्यों से सट्टा पैनल और मास्टर आईडी उपलब्ध कराते थे।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि गिरोह फर्जी सिम कार्ड खरीदकर उनका इस्तेमाल करता था और बाद में उन्हें नष्ट कर देता था। युवकों को कोलकाता स्थित फ्लैट में ले जाकर ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित कराया जाता था। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल, वाहन, नकदी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर साइबर फॉरेंसिक जांच कराई है। हालांकि चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और पूरे सट्टा नेटवर्क की वित्तीय जांच अभी भी जारी है।
