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रायपुर साहित्य उत्सव में समाज और सिनेमा पर विचारों का संगम, उमड़ी श्रोताओं की भीड़

रायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत समाज और सिनेमा विषय पर आयोजित परिचर्चा ने श्रोताओं का खासा ध्यान खींचा। अनिरुद्ध नीरव मंडप में हुई इस चर्चा को सुनने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे।

सत्र में हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध लेखक-निर्देशक अनुराग बसु, इतिहासकार-पटकथा लेखक एवं निर्माता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी और सिनेमा लेखक अनंत विजय ने अपने विचार रखे। परिचर्चा का संचालन छत्तीसगढ़ के चर्चित लेखक-निर्देशक मनोज वर्मा ने किया।

निर्देशक अनुराग बसु ने कहा कि सिनेमा समाज को दिशा देने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि आज भी कई फिल्मकार जोखिम उठाकर सामाजिक सरोकार से जुड़ी फिल्में बना रहे हैं।

तकनीक बढ़ी है, विषय बदले हैं और नई कहानियां सामने आ रही हैं। फिल्म को अच्छा या बुरा कहना व्यक्तिगत दृष्टि का विषय है, क्योंकि हर निर्देशक ईमानदारी से अपना काम करता है।

डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि आज सिनेमा को देखने का मापदंड बदल गया है। हिट-फ्लॉप की सोच हावी है और सामाजिक सरोकार पीछे छूट रहे हैं। उन्होंने हिंदी भाषा की चुनौती और बदलते दौर की ओर भी ध्यान दिलाया।

सिनेमा लेखक अनंत विजय ने कहा कि सिनेमा कोई एलिट माध्यम नहीं, बल्कि आम लोगों से भावनात्मक जुड़ाव रखने वाली कला है। यही जुड़ाव फिल्मों की सामाजिक और व्यावसायिक सफलता तय करता है।

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