रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में सर्वे, लक्ष्य, स्वीकृति और पूर्ण आवास के आंकड़े सामने रखे जा रहे हैं। इसी बीच पुराने पात्र हितग्राहियों के मैदानी सत्यापन में करीब 2 लाख लोग अपात्र पाए गए। सरकार के मुताबिक पिछले ढाई साल में 11.50 लाख से अधिक आवास पूरे किए जा चुके हैं।
पीएम आवास के लिए वर्ष 2011 के सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना सर्वे में करीब 18.75 लाख हितग्राही पात्र पाए गए थे। वर्ष 2018 के सर्वे में करीब 8.19 लाख नए नाम जुड़े। इन आंकड़ों के आधार पर पात्रता का दायरा करीब 27 लाख तक पहुंचा। अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में इन परिवारों के लिए आवास स्वीकृति और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
18 लाख के आंकड़े पर विवाद
वर्तमान सरकार ने दिसंबर 2023 में पहली कैबिनेट बैठक के दौरान करीब 18 लाख आवासों के लक्ष्य से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मुताबिक इसमें 2.46 लाख पुराने लंबित आवास, 6.99 लाख स्थायी प्रतीक्षा सूची, 8.19 लाख आवास प्लस और करीब 47 हजार मुख्यमंत्री आवास योजना के हितग्राही शामिल थे।
बाद में मैदानी सत्यापन कराया गया। लंबे समय में कई हितग्राहियों की मृत्यु, पलायन या पात्रता बदलने के कारण करीब 2 लाख नाम अपात्र पाए गए। ग्राम सभाओं के माध्यम से ऐसे नाम हटाए गए और पात्र परिवारों के आवास निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
11.50 लाख से ज्यादा आवास पूरे
सरकार के अनुसार पिछले ढाई वर्षों में 11.50 लाख से ज्यादा पीएम आवास पूरे हो चुके हैं। 11 सितंबर को सक्ती में 2 लाख नए आवासों का गृह प्रवेश भी कराया गया। इसी कार्यक्रम में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3,65,179 नए ग्रामीण आवासों का लक्ष्य मिलने की जानकारी दी गई। यह लक्ष्य आवास प्लस-2024 सर्वे में शामिल पात्र परिवारों के लिए है।
इस तरह मौजूदा राजनीतिक विवाद में पुराने सर्वे, राज्य सरकार के लक्ष्य, केंद्र की मंजूरी और वास्तविक रूप से पूर्ण हुए आवासों के आंकड़ों को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।
